‘मैंने तीन सदियाँ देखी हैं…..!’
….वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री त्रिलोक दीप का अविभाजित गुजरात एवं रावलपिंडी से लोकसभा सचिवालय होते हुए जोधपुर एवं राजस्थान का सफरनामा…भाग-4
इस कक्ष को दिखाने के बाद स्वामी योगेश पुरी मुझे एक खासी ऊंची बिल्डिंग दिखाने के लिए ले गये जिसके धुर ऊपर जाकर ओम की आकृति को स्पष्ट देखा जा सकता है. ओम की इस आकृति देखने के लिए 108 फीट की सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं. हालांकि ये सीढ़ियां बहुत ही सुगम और सुविधाजनक हैं बावजूद इसके एक तो अपनी बढ़ती उम्र, दूसरे सीढ़ियों के साथ सहारा न होने से डर लगता था लिहाजा आगे चलते हुए मैंने स्वामी जी का हाथ पकड़ा और मेरे पीछे मेरा ड्राइवर होने से मैं अपने आप को महफ़ूज महसूस कर रहा था.शिखर के ऊपर का नज़ारा अद्भुत था. नीचे ओम की आकृति देखकर स्वामी योगेश पुरी की वास्तुकला की तारीफ किए बिना नहीं रह सका. वह विनीत इतने कि हाथ
जोड़कर बोले कि यह गुरु जी स्वामी महेश्वरानंद पुरी जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद का फल है. मेरे ड्राइवर ने नीचे की ओम आकृति और स्वामी योगेश पुरी के साथ चित्र लिये.उस शिखर से पूरा परिसर बहुत ही अद्भुत और सुंदर दीख रहा था. यह भी बताया गया कि जब कोई विमान और हेलीकाप्टर यहां से गुज़रता है तो उसमें बैठे यात्रियों को ओम की आकृति साफ दीखती है. वहीं शिखर से पानी की एक बहुत बड़ी टंकी दीखी जो 90 फीट की ऊंचाई पर बनी हुई है जिस पर बारह मंदिर हैं.सबसे ऊंचाई पर भगवान सूर्य को समर्पित सूर्य मंदिर है. नीचे एक झील ओम प्रतीक के अर्द्धचंद्राकार के रूप में परिलक्षित करती है.पानी की टंकी के ऊपर का सूर्य मंदिर है जहां महादेव का शिवलिंग और उसके ऊपर ब्रह्मांड की आकृति है.यह शिवलिंग स्फटिक का है. मंदिर में ऐसे दो सौ पवित्र स्तंभ बने हुए हैं जिन पर अलग अलग देवी देवताओं की मूर्तियां हैं. बेशक यह ओम आश्रम दिव्य आकार का भव्य भवन है जहां वास्तुकला, हस्तकला और शिल्पकला का बेजोड़ नमूना परिलक्षित होता है । मंदिर में कुल 1100 स्तंभ हैं जिन पर विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ उकेरी गई हैं.
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स्वामी योगेश पुरी ने बताया कि यह विश्व का एकमात्र ऐसा आश्रम है जहां भारतीय योग विज्ञान और वैदिक संस्कृति को आने वाली पीढ़ी के बीच जीवित रखना है ।बाहरी हिस्से में स्वस्तिक के चिन्ह अंकित हैं.यहां आकर लोग योग की ताकत को बखूबी समझेंगे. प्रार्थना भवन के पास एक भक्ति सागर भवन है जहां गुरु जी के सभी अवार्ड्स रखे हैं और अलग से एक फोटो गैलरी भी है. साथ ही एक शिव मंदिर भी है.शिव मंदिर भूगर्भ में भी है और प्रार्थना भवन के पास भी. एक तरह कह सकते हैं कि ‘ओम आश्रम’ शिवमय है. चारों ओर नज़र डालने से किसी न किसी रूप में शिव की उपस्थिति अनुभव होगी या उनकी कई प्रकार से उकेरी गयी मूर्तियों से शिवलिंग से. निस्संदेह बहुत ही भक्तिमय वातावरण है।
यहां
देवेश्वर गौशाला में एक हज़ार से अधिक गायें हैं ।अधिक नंदी (बैल) और देसी गायें हैं. बीमार, बूढ़ी और बेघरबार गायों की देखभाल होती है. गायों के दूध वहां के रहने वालों और काम करने वालों के बीच वितरित किया जाता है. देवेश्वर गौशाला के अतिरिक्त पांच-छह और गौशालायें भी हैं.रूपवास में भी एक आश्रम बना हुआ है. वहां पर भी छह-सात सौ गायें हैं. ‘बाप जी’ के गांव का आश्रम भी भव्य है. स्वामी जी को बीच में टोकते हुए मैंने उनसे पूछा कि स्वामी जी को आप कैसे संबोधित करते हैं, वह थोड़ा मुस्कुराये और बोले किसी भी आदरसूचक संबोधन से जैसे ‘बाप जी’,’ गुरु जी’,’ स्वामीजी’ आदि.वैसे ही राजस्थानी परंपरा भी है। मैंने कई बार जोधपुर के लोगों को पूर्व महाराजा गजसिंह को ‘बाप जी संबोधित करते हुए सुना था।वैसे ही वहां के एक संत स्वामी अचलानंद जी महाराज को भी लोगबाग ‘बाप जी’ कह कर संबोधित करते हुए ।
स्वामी योगेश पुरी के अनुसार ‘ओम’ के उच्चारण से आप एक ऐसी ध्वनि का अनुभव करते हैं जो आपके शरीर में कास्मिक तरंगें बिखेरती नज़र आती है.’ओम’ में प्रयुक्त तीन शब्द ‘अ’,’ओ’ और ‘म’ इस ध्वनि का प्रतीक हैं. यह ब्रह्मांडीय कंपन,मूल शाश्वत ध्वनि का प्रतिनिधित्व करता है ।ओम सृष्टि का अंतर्निहित स्रोत है,आदि-अनादि.ओम पूर्णता का प्रतिनिधित्व करता है.आप आंखें बंद कर दत्तचित्त हो पूरे मनोयोग से यह ध्वनि अपने मुंह से निकालेंगे तो आप ‘आदि-अनादि’ का अनुभव करेंगे.
सृष्टि के रचयिता कहे और माने जाने वाले त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश को ओम का प्रतीक माना जाता है जिसके जाप से शरीर को गजब की सफूर्ति और मन को शांति प्राप्त होती है.’ओम’ का निराकार स्वरूप धरती पर पहली बार साकार हुआ है.
स्वामी योगेश पुरी ने बताया कि गुरु जी को योग और अध्यात्म का बहुत अच्छा अनुभव है.वह प्राचीन योग और आधुनिक विज्ञान को साथ साथ लेकर प्रेरणा देते हैं. दैनिक जीवन में योग के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि मानवता के कल्याण के साथ साथ संसार के सभी जीवों का भला होगा. वह जहां भी जाते हैं लोगों को आत्मज्ञान और सबसे प्रेम करने का संदेश देते हैं.जीवन का सत्य और सही मार्ग समझने में उनकी मदद करते हैं,राष्ट्रों की आपसी सांस्कृतिक,धार्मिक समझ बढ़े वे एक दूसरे का आदर करें और उनमें सहनशक्ति बढ़े, सभी पर्यावरण प्रकृति की सुरक्षा का ध्यान रखें और शाकाहार को अपनायें यह उनका मुख्य परामर्श रहता है.
स्वामी महेश्वरानंद जी के उद्देश्यों की विस्तृत व्याख्या करते हुए स्वामी योगेश पुरी कहते हैं कि वह इस पूरे आश्रम को ऐसा बनाना चाहते हैं जिससे समाज के सभी वर्ग के लोगों का बिना किसी भेदभाव के भला हो,हिफाजत हो और उनके आगे बढ़ने के अवसर अवरुद्ध न हों.
वे सभी जीवों के लिए शारीरिक,सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य चाहते हैं. गुरु जी यह भी चाहते हैं कि सभी जंतुओं की जिंदगियों का सम्मान हो, सभीधर्मों,संस्कृतियों और राष्ट्रों के बीच सहनशीलता, सम्मान तथा भाईचारे की भावना विकसित हो तथा सभी मनुष्यों और पशुओं के अधिकार सुरक्षित रहें और पर्यावरण स्वास्थ्यवर्धक हो. वे सनातन संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के पक्षधर हैं और चाहते हैं कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का अधिक से अधिक अनुसरणकिया जाये ।
सुरम्य प्राकृतिक वातावरण में स्थित ‘ओम आश्रम’ में जब आप प्रवेश करते हैं तो आप एक अलौकिक शक्ति का अनुभव करते हैं. वह संभवतः इसलिए कि यह स्थान आपको ब्रह्मांड-सा प्रतीत होता है जिसके दर्शन आपको बहुत दूर से ही हो जाते हैं.रही सही कसर शिव मंदिर के भीतर जाकर पूरी हो जाती है. वहां आपको एक ऐसे शिवलिंग का स्वरूप देखने को मिलेगा जिसमें बारह ज्योतिर्लिंग हैं. बताया जाता है कि इस विस्मयकारी शिवलिंग का निर्माण ओडिसा में हुआ है.मंदिर की दीवारों पर शिव के 1008 स्वरूप की आकृतियाँ उकेरी गयी हैं जो भक्तजनों और दर्शकों को भी बहुत सुकून प्रदान करती हैं और वे दत्तचित्त हो कभी उन्हें निहारते हैं और कभी आंखें बंद करके उनमें डूब जाना चाहते हैं। (….अगले अंक में जारी)
