राजस्थान के पाली के पास है दुनिया का एक अनोखा 'बुलेट बाबा का मंदिर' - News On Radar India

राजस्थान के पाली के पास है दुनिया का एक अनोखा ‘बुलेट बाबा का मंदिर’

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं लोकसभा सचिवालय कार्यानुभव वाले 90 वर्षीय श्री त्रिलोक दीप भारत विभाजन के अनुभव, देश विदेश की यात्राओं और दिनमान पत्रिका के संपादन सहित सात दशकों की पत्रकारिता पूंजी हमारे पाठकों के साथ बांटते हुए…!

44

                 राजस्थान कई ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मंदिरों, दुर्गों और किलों के लिए प्रसिद्ध है लेकिन जिस अनोखे एकमात्र मंदिर की कम लोगों को ही जानकारी होगी वह पाली के करीब स्थित है ‘बुलेट बाबा का मंदिर’. इसे ‘ओम बन्ना मंदिर’  भी कहते हैं और ‘बुलेट धाम’  भी. अभी तक तो पाली रणकपुर जैन मंदिर और ओम आश्रम के लिए ही प्रसिद्ध था लेकिन बुलेट बाबा मंदिर ने उसकी और मशहूरी बढ़ा दी है. मैंने लगभग पूरा राजस्थान देखा है, धुर भीतर तक जा कर. लेकिन जोधपुर में मैं सबसे अधिक बार आया 40 से 50 बार 2017 तक. जोधपुर से पाली राजमार्ग पर भी जाना हुआ दसियों बार. कभी डालमिया सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित चिकित्सा शिविरों में भाग लेने के लिए, कभी ओम आश्रम में स्वामी योगेश पुरी के साथ वहां का निर्माणाधीन कार्य देखने के लिए तो कभी पाली के आगे संडेराव, सोजत, बाली, रानी, जैतारण जैसे गाँवों में लगने वाले चिकित्सा शिविरों का निरीक्षण करने के लिए. सोजत को मेहंदी (हिना) नगरी भी कहा जाता है. यहां देश की सबसे बड़ी मेहंदी मंडी है जहां से करीब सवा सौ देशों को निर्यात की जाती है. जैतारण ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है. भक्त शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थान कुड़की गांव जैतारण क्षेत्र के पास ही स्थित है. इसके अलावा यहां भावाल माता मंदिर और मारुधर केसरी पावनधाम जैसे धार्मिक स्थल हैं. यह शहर अपने पारंपरिक राजस्थानी हस्तशिल्प, कपड़े, मिट्टी के बर्तन और आभूषणों के व्यापार के लिए भी जाना जाता है.रानी में सबसे प्रसिद्ध साई धाम मंदिर है जो हूबहू शिरडी के साई बाबा मंदिर की तर्ज पर बना हुआ है.

मेरी आदत है मैं जहां भी जाता हूं उस स्थान की खासियत के बारे में ज़रूर पूछता हूं. एक बार मैं जोधपुर से पाली जा रहा था. रास्ते में रोहिट में वहां की कचौड़ी खाई. आगे बढ़ने पर देखा कि मेरी दाहिनी तरफ सड़क की कुछ दूरी पर एक चबूतरे पर मोटरसाइकिल खड़ा है,उसमें फूलों के हार पड़े हैं और कुछ लोग उसकी परिक्रमा कर रहे हैं. मैंने अपने ड्राइवर से इस बाइक के बारे में पूछा. उसने बताया कि यह बाइक एक राजपूत ओम बन्ना  की है जिसका एक पेड़ से टकराने से एक्सीडेंट हो गया था और उसकी मौके पर ही मौत हो गयी थी. पुलिस इस बाइक को ज़ब्त कर रोहिट थाने ले गयी. अगले दिन सुबह पुलिस ने देखा कि बाइक गायब है. वह तलाशते हुए एक्सीडेंट वाले स्थान पर पहुंची तो उसे वहां बाइक देखकर अचरज हुआ. बाइक को फिर थाने में लाया गया. लेकिन वह वहां टिकी नहीं. उसमें से पेट्रोल निकालकर जंजीरों से बांध दिया गया लेकिन वह बाइक सब तोड़कर एक्सीडेंट वाले स्थान पर पहुंच गयी. लिहाज़ा पुलिस और यहां के ग्रामीणों ने इस बाइक को ‘दैवीय शक्ति’ बताकर उसी स्थान पर रहने दिया जहां ओम बन्ना का एक्सीडेंट हुआ था. उस दिन के बाद से यह बुलेट पूज्य हो गयी है.

ड्राइवर का विवरण सुनकर मैं दंग रह गया. पाली में भी लोगों ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने बताया कि पाली के पुलिस अधिकारी भी सकते की हालत में हैं और इसके रहस्य को नहीं जान पाये हैं. जोधपुर में भी कुछ पत्रकारों ने बताया कि अब तो उस बुलेट को ‘रक्षक लोक देवता’ माना जा रहा है. बहरहाल, ओम बन्ना मंदिर, जो ‘बुलेट बाबा का मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध है किसी भगवान की मूर्ति की नहीं बल्कि ओम सिंह राठौड़ और उनकी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल (नंबर RNJ 7773) की पूजा की जाती है. राजस्थान के पाली ज़िले में चोटिला गांव में जोधपुर -पाली राजमार्ग पर स्थित एक अनोखा और प्रसिद्ध तीर्थस्थल है जिसे ‘बुलेट धाम’ भी कहा जाता है.आजकल यह एक पवित्र दर्शनीय स्थल बन गया है. कुछ लोग इस स्थान के बारे में मानते हैं कि यह ओम बन्ना का स्थान है जो एक बुलेट के रूप में पूजे जाते हैं तथा यह मंदिर पूरी दुनिया का अनोखा और एक मात्र बुलेट मंदिर है.

1964 में जन्मे ओम बन्ना चोटिला, पाली ठिकाने के ठाकुर जोगसिंह के पुत्र थे. उनका असली नाम ओम सिंह राठौड़ है. ‘बन्ना’ राजपूत युवाओं के लिए प्रयुक्त एक सम्मानजनक शब्द है. 2 दिसंबर, 1988 में ओम बन्ना अपनी बुलेट पर अपनी ससुराल बगड़ी, सांडेराव से गांव चोटिला जा रहे थे तभी उनका एक्सीडेंट एक पेड़ से टकराने से हो गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गयी. पुलिस उस बुलेट क़ो ज़ब्त कर रोहिट थाने ले गयी. अगले दिन सुबह देखा तो वह बुलेट थाने से गायब थी. पुलिस उसे तलाशते हुए जब दुर्घटनास्थल पर पहुंची तो उसे वहां देखकर हैरान रह गयी. बुलेट क़ो वहां से पुन: रोहिट थाने लाया गया लेकिन फिर वैसा ही हुआ. चौथी बार पुलिस ने बुलेट से पेट्रोल निकालकर जंजीरों से जकड़ कर बांधकर रखा लेकिन वह सबके सामने स्टार्ट होकर अपने मालिक सवार के दुर्घटनास्थल तक पहुंच गयी. लिहाज़ा पुलिस और ग्रामीणों ने इसे ‘दैवीय चमत्कार’ मानकर उस बुलेट क़ो वहीं रख दिया. उस दिन के बाद से आज तक वहां दूसरी बड़ी दुर्घटना नहीं हुई. पहले यह स्थान राजस्थान के बड़े दुर्घटना वाले क्षेत्रों में माना जाता था. लगता है ओम बन्ना की ‘पवित्र आत्मा’ आज भी लोगों को उनकी मौजूदगी का अहसास कराती है. ऐसा वहां के लोगों का मानना है. इस बुलेट के कई नाम हो गए हैं, जैसे ‘बुलेट बाबा’, ‘ओम बन्ना धाम’ ‘ओम बन्ना मंदिर’ आदि. बाइक को ‘लोक देवता’ माना जाने लगा है और वैसे ही उसकी आराधना होती है. अब दूर दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं.

मैंने उस स्थान को पांच छह बार आते जाते देखा था. पहले सिर्फ एक चबूतरे पर बुलेट खड़ी रहती थी. सड़क के दोनों तरफ सामान्य खाली स्थान थे. पास के गांव से लोग फूल मालाएं लाकर बुलेट को पहनाया करते थे. अगली कुछ यात्राओं में देखा कि सड़क के दोनों ओर के खाली स्थान भर गए थे. मंदिर से जुड़ी सभी प्रकार की सामग्री की दुकानें खुल गयी थीं और कुछ होटल भी बन गए थे. बुलेट बाहर के चबूतरे से पीछे एक कक्ष में विराजमान हो गयी थी. उस कक्ष को मंदिर का स्वरूप प्रदान कर पंडित जी बिठा दिए गए थे.  2017 में जब मैं आखिरी बार उधर से गुज़रा तो लोगों की भीड़ देखकर घबरा गया. ड्राइवर मुझे गाड़ी में बिठाकर ‘दर्शन’ कर आया था. आज हालत यह है कि राष्ट्रीय मार्ग के एक कक्ष में वही बुलेट मौजूद है और ओम बन्ना का चबूतरा भी है जहां उनका एक्सीडेंट हुआ था. वहां दिन रात जोत जलती रहती है. ग्रामीण और अन्य श्रद्धालु यहां नारियल और मिठाई , फूल और अगरबत्ती, लाल धागा और तिलक, दारू आदि का चढ़ावा चढ़ाते हैं. मंदिर में शराब चढ़ाने को लेकर मैंने एक व्यक्ति से इसकी प्रासंगिकता के बारे में पूछा तो उसने बताया कि यह एक परंपरा है जो मुख्य रूप से लोकाचार और उनकी बाइक से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित है. मन्नत पूरी होने पर भक्त प्रसाद के रूप में शराब विशेषकर व्हिस्की या रम की बोतल अर्पित करते हैं. स्थानीय लोगों और चालकों का विश्वास है कि यह वस्तु उन्हें प्रिय थी और इसे चढ़ाने से बुलेट बाबा प्रसन्न होते हैं तथा यात्रियों की रक्षा करते हैं. कुछ लोग तो सिगरेट चढ़ाते हुए भी बताये गए थे. पूछताछ से यह भी जानकारी मिली कि बुलेट बाबा से हज़ारों लोग सुरक्षित यात्रा की कामना करने और मनोकामना मांगने के लिए मंदिर आते हैं. ट्रक ड्राइवर अक्सर यात्रा शुरू करने से पहले यहां रुकते हैं और प्रार्थना करते हैं. मन्नत पूरी होने पर वह अपना माना हुआ ‘प्रसाद’ इस ‘ओम बन्ना मंदिर’ में चढ़ाते हैं.

ओम बन्ना की 10 मार्च 1988 को शादी हुई थी और उसी साल दिसंबर में उनका निधन हो गया. उस समय उनकी पत्नी उर्मिला कंवर गर्भवती थीं. ओम बन्ना का एक बेटा है ठाकुर महापराक्रमी सिंह जो उनके निधन के बाद पैदा हुआ था. अब वह भी बहुत बड़ा हो गया है. बुलेट बाबा मंदिर पाली शहर से 20 किलोमीटर और जोधपुर से  53 किलोमीटर दूर है. आजकल यहां भी वैसे विशेष वार्षिक मेला जुड़ता है जैसे राम देवरा मंदिर में तथा सालासर में बालाजी और खाटू श्याम जी के मंदिरों में जुड़ते हैं. यहां दिक्क़त यह है कि ओम बन्ना मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है इसलिए श्रद्धालुओं की संख्या पर नियंत्रण रखना पड़ता है. बेशक राजस्थान में छोटे-बड़े मंदिरों की संख्या हज़ारों में है जो विभिन्न श्रेणियों में विभाजित हैं जैसे आत्मनिर्भर मंदिर , सुपुर्दगी प्रथम श्रेणी, सुपुर्दगी द्वितीय श्रेणी तथा कुल राजकीय प्रबंधित मंदिर. सुपुर्दगी श्रेणी वाले मंदिरों को सरकार द्वारा आंशिक या पूर्ण सहायता मिलती है. इसके अलावा करीब 24 हज़ार ऐसे निजी सार्वजनिक मंदिर हैं जो देवस्थाTrilok Deepन विभाग से पंजीकृत हैं. बुलेट बाबा मंदिर की व्यवस्था और देखभाल के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया है और इसे आधिकारिक मान्यता व सरकारी स्तर पर भी सहयोग प्राप्त है. इस स्थल की लोकप्रियता और धार्मिक महत्व को देखते हुए प्रशासनिक व सरकारी स्तर पर इसका विकास और विस्तार किया जा रहा है. आज पूरे राजस्थान में इस ‘बुलेट बाबा मंदिर’ की चर्चा है जिसके  ‘दर्शन’ करने के लिए दूर दराज़ के लोग भारी संख्या में आते….. !     यह देश का अनोखा मंदिर जो ठहरा  !        ……….. त्रिलोक दीप .

Advertisements
You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Join WhatsApp Group