'मैंने तीन सदियाँ देखी हैं....!' - News On Radar India

‘मैंने तीन सदियाँ देखी हैं….!’

….वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री त्रिलोक दीप का अविभाजित गुजरात एवं रावलपिंडी से लोकसभा सचिवालय होते हुए जोधपुर एवं राजस्थान का सफरनामा…भाग-5

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            विश्वद्वीप ओम गुरुकुल बहुत लंबा चौड़ा है.यहां पर स्कूल और कॉलेज भी हैं और चिकित्सकीय सुविधाएं भी.यहां पर योग विश्वविद्यालय बनाने का भी प्रावधान है.योग पर चर्चा को आगे बढ़ते स्वामी योगेश पुरी लगता था कहीं खो गये थे.योग आध्यात्म है, आत्मविज्ञान,आत्मज्ञान है जो केवल आसनों तक ही सीमित नहीं है.यहां हठयोग का आधुनिक रूप अपनाया जाता है जिसे शारीरिक फिटनेस,तनाव शैथिल्य और विश्रृंति की प्रधानता का प्रतीक है. हठयोग सत्कर्म पर केंद्रित है.भौतिक शरीर की शुद्धता मन की शुद्धता होती है.इसके लिए आपको अहंकार,काम,क्रोध,मोह और लालच को छोड़ना होता है. ईसा संवत से पहले योग प्रचलित था. इसका उल्लेख उपनिषद में भी मिलता है.
कई तरह के योग हैं:बौद्ध,जैन और सनातन.योग से भगवान तक पहुंचा जा सकता है.यह तो आपकी साधना पर निर्भर करता है कि आप कितने निर्लिप्त होकर ध्यान लगाते हैं, ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करते हुए मोक्ष के द्वार तक पहुंचते हैं.
योग की शुरुआत आसन से होती है, प्राणायाम अगली सीढ़ी है,बाद में प्रत्याहर है,उसके बाद ध्यान और अंत में समाधि. यह पूछे जाने पर कि स्वामी महेश्वरानंद ने कौनसी विधा प्राप्त की है तो योगेश पुरी जी ने बताया कि वे ब्रह्मज्ञानी हैं ।इसपर मुझे गुरु ग्रंथ साहब में ‘सुखमनी’ में निहित एक श्लोक याद हो आया जिसके अनुसार ‘ब्रह्मज्ञानी’ ‘अनाथ का नाथ, ब्रह्मज्ञानी का सब उपर हाथ’। निस्संदेह वह बहुत पहुंचे हुए संत हैं. ऐसा योगेश पुरी मानते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार, लेTrilok Deepखक एवं लोकसभा सचिवालय कार्यनुभव वाले श्री त्रिलोक दीप, देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक क्षितिज पर एक चमकते हुए स्तंभ हैं। अविभाजित भारत के गुजरात की तहसील फालिया में जन्मे और रावलपिंडी के डेनीज़ स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने, बाद में  माधवराव सप्रे स्कूल, रायपुर (छत्तीसगढ़) से माध्यमिक स्कूल तक पढ़ाई की.  90 वर्षीय त्रिलोक जी ने भारत के विभाजन को झेला और अपने अनुभवों को पत्रकारिता में समेटा है। ‘चढ़ता हुआ रंग’, ‘स्वप्न और परछाईं’, ‘ठंडा रेगिस्तान’ जैसे उपन्यासों और कहानी संग्रहों के अलावा उन्होंने संस्मरण के द्वारा पाकिस्तान, अमेरिका, यूरोप, तत्कालीन सोवियत संघ की यात्राओं के अनुभव एवं अपने वरिष्ठ नामी पत्रकारों  सच्चिदानंद  वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, रघुवीर सहाय की जीवनी संकलन भी लिखे हैं। त्रिलोक दीप  दिनमान पत्रिका एवं संडे मेल के संपादक भी रहे हैं। ऑल इंडिया रेडियो के प्रोग्राम  संचालक  त्रिलोक जी प्रतिष्ठित आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एवं कई मीडिया पुरस्कारों से नवाजे गये हैं….                                       ‘मैंने तीन सदियाँ देखी हैं ‘ उनके 70 वर्ष के पत्रकार जीवन का सारांश (5 भाग में), www.NewsOnRadar.com के पाठकों के लिए विशेषानुमति के साथ.

15 अगस्त,1945 में रूपवास में जन्मे स्वामी महेश्वरानंद का असली नाम मांगीलाल था.उनके पिता पंडित कृष्ण रामजी ज्योतिषी और धार्मिक प्रवृति के थे.तीन साल की आयु में ही बालक मांगीलाल ध्यान में लीन रहने लगे. अभी वे बारह वर्ष के ही थे कि उनके पिता का निधन हो गया.उनकी माता ने उन्हें उनके चाचा स्वामी माधवानंद के पास निपाल भेज दिया.शुरू में पढ़ाई में उनकी ज़्यादा रुचि नहीं थी इसलिए वे अपने चाचा से संन्यासी बनाने को कहा करते थे जिसे कुछ समय बाद उनके चाचा ने उनकी यह इच्छापूर्ति कर दी. उन्हें छह माह तक योग के बड़े कठिन नियमों से गुज़रना पड़ा. इसमें ध्यान के साथ साथ उपवास भी शामिल था.सत्रह बरस की उम्र में उन्हें आत्मसिद्धि प्राप्त हो गयी.1967 में वे स्वामी बना दिये गये तथा 1972 में ऑस्ट्रिया-भारत योग वेदांत छात्रवृत्ति प्राप्त कर विएना पहुंच गये और पहला श्री दीप माधवानंद आश्रम स्थापित किया |

‘ओम आश्रम’ के अतिरिक्त आधे हिस्से में स्कूल, कॉलेज हैं,अस्पताल हैं, वातावरण को स्वस्थ और आक्सीजन को बनाये रखने के लिए जंगल है.योग विश्वविद्यालय जल्दी अस्तित्व में आयेगा.पहले मेडिकल कॉलेज की भी योजना थी लेकिन हाल में सरकार द्वारा पाली में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की घोषणा से यहां अस्पताल बनाने का ही निर्णय लिया गया.जोधपुर में पहले से ही एक मेडिकल कॉलेज है.प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तक शिक्षा दी जाती है.यहां भी बच्चे प्राचीन गुरुकुल पद्धति के अनुसार शिक्षा प्राप्त करें ऐसे प्रयास भी सुनने को मिले जिससे उनमें वैसे ही अनुशासन की भावना विकसित हो जैसी पुरातनकाल में थी और अपने गुरुओं के प्रति आदर सम्मान की भावना भी. बेशक यहां पर सनातन भारतीय संस्कृति के साथ साथ योग सीखने पर ज़ोर दिया जाता है, बावजूद इसके यहां का स्कूल और कॉलेज आधुनिक शिक्षा प्रणाली के विरुद्ध नहीं हैं.यहां के कॉलेज में कला,विज्ञान, कामर्स के पाठ्यक्रम भी हैं और खेलकूद के लिए खुले और बड़े मैदान भी. रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम भी हैं तो संगीत,कला और कंप्यूटर के शिक्षण की व्यवस्था भी.

फरवरी, 2024 को ‘ओम आश्रम’ पूरी तरह से तैयार हो गया और उसकी प्राण प्रतिष्ठा भी हो गयी. यह आश्रम सुबह 6.30 बजे से रात 8.30 बजे तक खुला रहता है. जाडन गांव नेशनल हाईवे 62 के किनारे स्थित है. पाली शहर से यह सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है. इसका निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर है जो यहां से लगभग 71 किलोमीटर दूर है. …….

                               

निस्संदेह ‘ओम आश्रम’ एक बार देखना तो बनता है. — त्रिलोक दीप.

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