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नूंह हिंसा आरोपी बिट्टू बजरंगी का विवादित बयान

कहा- मैं नहीं था, फिर भी दंगा हुआ; मेवात में योगी का बुलडोजर चलना चाहिए….

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नूंह (हरियाणा) — हरियाणा के नूंह जिले में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के आरोपी बिट्टू बजरंगी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में बिट्टू बजरंगी यह कहते नजर आ रहा है कि हिंसा के दिन वह मौके पर मौजूद नहीं था, फिर भी दंगा हो गया। इसके साथ ही उसने मेवात में “योगी स्टाइल” में बुलडोजर कार्रवाई चलाने की मांग कर दी।

वीडियो में बिट्टू बजरंगी का कहना है कि उसके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और कुछ लोग उसे हिंसा का मुख्य जिम्मेदार बताकर साजिश रच रहे हैं। उसने दावा किया कि अगर उसकी मौजूदगी के बिना ही दंगा हो सकता है, तो असली दोषियों की पहचान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उसके बुलडोजर वाले बयान पर राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों का कहना है कि इस तरह की बातें माहौल को और भड़काने का काम करती हैं। वहीं, कुछ समर्थकों का कहना है कि उसका बयान कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने का इशारा है।

नूंह हिंसा, जो कुछ समय पहले धार्मिक शोभायात्रा के दौरान भड़की थी, में कई लोग मारे गए और बड़ी संख्या में घायल हुए थे। इस हिंसा के बाद जिले में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन लगातार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की कार्रवाई कर रहे हैं। बिट्टू बजरंगी पहले भी कई बार अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुका है और इस मामले में भी उसका नाम आरोपियों की सूची में शामिल है।

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, बिट्टू बजरंगी पर पहले से ही कई मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही है। इस नए बयान के सामने आने के बाद संभावना है कि उसके खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में भी कार्रवाई हो सकती है।

मेवात क्षेत्र, जहां नूंह जिला आता है, लंबे समय से साम्प्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के कारण सुर्खियों में रहता है। बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस नीति से जुड़ा है, जिसमें अवैध निर्माण और आरोपियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे समय में जब प्रशासन शांति बहाल करने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, तब सार्वजनिक मंचों से इस तरह के बयान तनाव को और बढ़ा सकते हैं। कुछ नागरिक संगठनों ने मांग की है कि नेताओं और प्रभावशाली लोगों को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और माहौल बिगाड़ने वाली टिप्पणियों से बचना चाहिए।

फिलहाल, बिट्टू बजरंगी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और बहस का विषय बना हुआ है। प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वीडियो की जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस पर कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं, यह देखना बाकी है, लेकिन इतना तय है कि यह बयान नूंह हिंसा मामले में नई राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे चुका है।

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