CISF द्वारा महत्वपूर्ण भवनों की सुरक्षा हेतु ड्रोन फेडरेशन के साथ एमओयू हस्ताक्षर…
...हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को मिलेगी मजबूती
सीआईएसएफ देश भर के 370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है, जिनमें परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं
नई दिल्ली: देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) को उभरते हुए हवा
ई खतरों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया ने शुक्रवार सीआईएसएफ मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
संस्थान द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, समझौते पर सीआईएसएफ की ओर से डॉ. सी. डी. नायक (डीआईजी व प्रिंसिपल, एमपीआरटीसी बहरोड़) और डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। यह कार्यक्रम सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बल के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें सुधीर कुमार (एडीजी, उत्तर) और विजय प्रकाश (एडीजी, मुख्यालय) भी मौजूद रहे। डीएफआई की ओर से शिरीन जोशी (निदेशक), शिवांगी प्रकाश (एसोसिएट डायरेक्टर) और समा सहगल (चीफ ऑफ स्टाफ) ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
आधुनिक हवाई खतरों से निपटने की मजबूत तैयारी : सीआईएसएफ वर्तमान में देश भर के 370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है, जिनमें विमानन (एविएशन), परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हवाई खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। ड्रोन तकनीक के तेजी से हो
रहे विस्तार और इसके बढ़ते खतरों को देखते हुए, संदिग्ध (Rogue) ड्रोन्स की समय रहते पहचान करना और उन्हें निष्क्रिय करना बेहद जरूरी हो गया है।
बल ने पहले से ही अपनी दैनिक कार्यप्रणाली में ड्रोन तकनीक को सफलतापूर्वक शामिल कर लिया है। अब तक 3,000 से अधिक सदस्यों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा, बल की लगभग 80 यूनिट्स लगातार निगरानी, खतरों की पहचान और ट्रेनिंग के लिए ड्रोन्स का सक्रिय रूप से उपयोग कर रही हैं। सीआईएसएफ ने इस विषय पर विशेषज्ञों (Domain experts) की एक टीम भी तैयार की है, जो बल के ऑपरेशन्स में ड्रोन तकनीक को शामिल करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
आरटीसी बहरोड़: ड्रोन तकनीक का नया ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस‘: इस समझौते का एक मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (RTC), बहरोड़ को ‘ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम’ के लिए एक उत्कृष्ट केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित करना है, जो गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के पूर्णतः अनुरूप होगा।
इस सहयोग के तहत, डीएफआई (DFI) भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स और तकनीकी कंपनियों के साथ मिलकर सीआईएसएफ की क्षमता निर्माण, व्यावहारिक अनुसंधान (एप्लाइड रिसर्च) और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने में मदद करेगा।
समझौते के प्रमुख बिंदु: काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती: सीआईएसएफ की सुरक्षा वाले प्रतिष्ठानों पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs), डिप्लॉयमेंट फ्रेमवर्क और पायलट प्रोजेक्ट विकसित करना।
फोरेंसिक और विश्लेषण: संदिग्ध ड्रोन्स (Rogue drones) की गतिविधियों के विश्लेषण, जांच और घटना के बाद के आकलन
के लिए बेहतरीन स्वदेशी फोरेंसिक उपकरणों और प्रक्रियाओं को स्थापित करना।
संयुक्त अभ्यास (Joint Drills): उभरते खतरों से निपटने के लिए संयुक्त ड्रिल और ‘रेड-टीमिंग’ (Red-teaming) अभ्यास आयोजित करना। इससे घुसपैठ करने वाले ड्रोन्स की पहचान, ट्रैकिंग, जवाबी कार्रवाई और घटना के बाद की तैयारियों को परखा जा सकेगा।
ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण: तकनीकी नियमों, ऑपरेशनल तरीकों और खतरों के विभिन्न परिदृश्यों को समझने के लिए विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल, स्टूडेंट हैकथॉन और चैलेंज प्रोग्राम डिजाइन करना।
महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा: “यह एमओयू सीआईएसएफ के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि हम आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम के क्षेत्र में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि सीआईएसएफ और डीएफआई के बीच यह साझेदारी गृह मंत्रालय द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। डीएफआई की भागीदारी से सीआईएसएफ को वास्तविक और लगातार बदलते ड्रोन खतरों के खिलाफ अपनी तैयारियों को परखने का मौका मिलेगा, जिससे हम अपनी मौजूदा प्रणालियों, प्रक्रियाओं और जवाबी कार्रवाई की कमियों को दूर कर सकेंगे।”
ड्रोन फेडरेशन अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा: “भारतीय ड्रोन उद्योग देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सीआईएसएफ का पूरा सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस साझेदारी के जरिए हमारा लक्ष्य सीआईएसएफ की ऑपरेशनल जरूरतों को स्वदेशी तकनीकी नवाचारों के साथ जोड़ना है। वास्तविक परिदृश्यों में हमारे स्टार्टअप्स की क्षमताओं का परीक्षण करके, मजबूत फोरेंसिक टूल विकसित करके और विशेष ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म बनाकर, हम एक तकनीकी रूप से मजबूत और ‘आत्मनिर्भर’ सुरक्षा ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।”