राजस्थान के धोरों के बीच मौजूद है 'ज्ञान का भंडार' एशिया की सबसे बड़ी भूमिगत लाइब्रेरी भादरिया में - News On Radar India

राजस्थान के धोरों के बीच मौजूद है ‘ज्ञान का भंडार’ एशिया की सबसे बड़ी भूमिगत लाइब्रेरी भादरिया में

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक श्री त्रिलोक दीप का अविभाजित गुजरात एवं रावलपिंडी से लोकसभा सचिवालय होते हुए जोधपुर एवं राजस्थान का सफरनामा…भाग-2

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          सारे परिसर को  देखते हुए अचानक मेरी नज़र वहां भूमिगत में रखी कुछ पुस्तकों पर पड़ी जिन्हें आलमारियों में करीने से सजाया जा रहा था । उन किताबों के रखरखाव पर एक व्यक्ति नज़र रख रहा था । निवेदन करने पर वह व्यक्ति हमें भूमिगत लाइब्रेरी दिखाने के लिए ले गया जो पूरी तरह से वातानुकूलित है । यह ज़मीन की सतह से सोलह फीट नीचे भूमिगत में निर्मित ग्रंथालय है,देश में अपने किस्म का अनोखा, अद्वितीय और असाधारण भूमिगत पुस्तकालय । इसे रेतीले धोरों में ज्ञान का अकूत खज़ाना भी माना जाता है. रेगिस्तान की चिलचिलाती गर्मी में भी यहां यह स्थान प्राकृतिक रूप से नियंत्रित और ठंडा रहता है.बेशक भादरिया महाराज ने 21 अप्रैल,1981 में इस भूमिगत लाइब्रेरी की नींव रख थी और 1996 में वह काफी हद तक तैयार भी हो गयी थी लेकिन यह कार्य इतना दुर्गम, विशाल, विस्तृत, चुनौतीपूर्ण और महत्वाकांक्षी है जो निरंतर चलते रहने वाला है।

बेशक राजस्थान के किलों, महलों और अभेद्ध दुर्गों के लिए प्रसिद्ध धोरों की धरती में यह भूमिगत लाइब्रेरी एक अजूबे से कम नहीं है. 2009 में मैंने लाइब्रेरी का एक चक्कर लगाया ।कुछ किताबों पर नज़र भी डाली । मेरे साथ चल रहे व्यक्ति ने बताया कि रेगिस्तान की तेज़ गर्मी और रेतीली आंधियों से पुस्तकों को सुरक्षित रखने के लिए इस भूमिगत लाइब्रेरी के तापमान को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रखा गया है. बाबा जी इसे ऐसा स्वरूप देना चाहते हैं जो भारत में तो उत्कृष्ट हो ही विश्व स्तर पर लाजवाब हो. 562 कांच की आलमारियों में करीने से सजाकर किताबें रखी हुई हैं. यहां चार गैलरियां हैं – दो 225-225 फ़ीट और दो 365-365 फ़ीट लंबी. इनके अतिरिक्त 16 हज़ार रैक हैं. यह लाइब्रेरी इतनी बड़ी है कि इसमें एक साथ पांच हज़ार से ज़्यादा लोग बैठ सकते हैं. किताबें ख़राब न हों इसके लिए पांच से छह महीने में विशेष प्रकार के लेप और पाउडर से इन्हें साफ किया जाता है. आलमारियों की भी सफाई होती है. लाइब्रेरी दो भागों में बंटी है : एक अध्ययन के लिए और दूसरा संग्रह के लिए. यहां पर पाठक सभी सुविधायों के साथ एक साथ बैठकर बड़े मनोयोग से पढ़ सकते हैं और इसकी गतिविधियों के बारे में विशेष फ़िल्म से सुन और देख भी सकते हैं. लाइब्रेरी के इस परिसर में 18 कमरे हैं जहां पाठकों और शोधकर्ताओं के रहने और भोजन की भी बहुत अच्छी व्यवस्था है. शोधकर्ता अपना कार्य पूरा होने तक बेखटके यहां निवास कर सकते हैं.

मुझे बताया गया कि बाबा जी ने यूरोप के पुराने महलों और मठों में भी बहुत सी लाइब्रेरियां देखी हैं लेकिन वहां उन्हें कहीं भी भूमिगत लाइब्रेरी देखने को नहीं मिली. बाद उन्हें पता चला कि वेटिकन सिटी में एक भूमिगत लाइब्रेरी है जिसे देखने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है. बाबा जी ने उस लाइब्रेरी को देखने का मन बना लिया. लेकिन उससे पहले उन्होंने स्वतः ही एक ऐसी भूमिगत लाइब्रेरी की कल्पना की जो एशिया महाद्वीप में अपने किस्म की एक अनोखी और अनूठी लाइब्रेरी हो जिसका कोई सानी न हो ।मुझे बताया गया कि विश्व का कोई ऐसा विषय नहीं है जिसपर यहां ग्रंथ उपलब्ध न हों।विश्व के मुख्य धर्म, दर्शन नीति, इतिहास, राजनीति, आध्यात्मिक, ज्ञान-विज्ञान, अर्थशास्त्र, जीवजगत, चिकित्सा विज्ञान, शब्द कोष,विज्ञान,खगोलशास्त्र से लेकर ज्योतिष, कानून, वेदों की संपूर्ण श्रृंखला, आयुर्वेद, पुराण, उपनिषद,सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथ, भारत का संविधान के अतिरिक्त महात्मा गांधी तथा देश के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के भाषण भी शामिल हैं. जर्मन लेखक एफ मैक्समूलर की रचनाएँ, इंसाइक्लोपीडिया की पुस्तकें, स्मृतियां और हज़ारों साल पुरानी पाण्डुलिपियाँ भी मौजूद हैं.यहां केवल हिंItalyदी और अंग्रेज़ी में ही नहीं अपितु संस्कृत,फारसी,उर्दू,तमिल आदि भाषाओं के दुर्लभ ग्रंथ भी उपलब्ध हैं.इस भूमिगत लाइब्रेरी में काफी पुस्तकें भादरिया बाबा को भेंट में भी प्राप्त हुई थीं लेकिन अधिसंख्य खरीदी गयी हैं. इन पुस्तकों की कीमत इस समय करीब 20 करोड़ आँकी जाती है.

वहां के लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि भादरिया महाराज ने यूरोप के कई देशों की यात्राएं कीं. जर्मनी के फ्रैंकफुर्ट बुक फेयर की यात्रा कर विभिन्न विषयों पर कुछ नायाब पुस्तकों का चयन कर ख़रीदा. उन्होंने ईसाइयों की पावन भूमि वेटिकन सिटी, जिसे ‘होली सिटी’ कहा जाता है, में वेटिकन अपोस्टोलिक जाकर भी भादरिया महाराज ने वेटिकन संग्रहालय के कोर्टाइल डेला के नीचे दो मंज़िला एक भूमिगत बंकर में जाकर विशाल दस्तावेज़ देखे. इनमें पोप और राजाओं के बीच पत्रव्यवहार, मध्यकालीन दस्तावेज और सदियों पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड शामिल हैं. आम जनता या पर्यटकों के लिए यहां सीधा प्रवेश वर्जित है, केवल विद्वानों और योग्य शोधकर्ताओं को ही विशेष अनुमति से प्रवेश मिलता है. अपनी विद्वता के कारण ही भादरिया महाराज को यहां जाने की Trilok Deepअनुमति मिली थी. इस अनुभव का उपयोग उन्होंने भादरिया भूमिगत लाइब्रेरी के सुधार में किया था. वेटिकन एक धार्मिक नगर है और भादरिया महाराज भी धार्मिक थे इस नाते उनकी पोप से भी विशेष भेंट कराई गयी थी. वेटिकन का क्षेत्रफल 109 एकड़ है और आबादी लगभग 882. इस लिहाज़ से यह दुनिया का सबसे छोटा संप्रभु राज्य है. होली सी द्वारा शासित वेटिकन सिटी स्टेट एक धार्मिक या यों कहें एक पूरीहित राजशाही राज्य है जो रोम के बिशप और कैथोलिक चर्च के प्रमुख हैं. यहां की आबादी में पादरी, नन और स्विस गार्ड्स हैं. महिलाओं की संख्या महज पांच प्रतिशत है. कैथोलिक ईसाइयों की प्रमुख चर्च यहीं है और पोप का भी यहीं निवास स्थान है.                                                        ….. …..….(अगले अंक में जारी)

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