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ग्लोबल सिख काउंसिल ने सत्कार कानून में तत्काल संशोधनों हेतु जत्थेदार को भेजा पत्र

पंजाब सरकार परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से तुरंत आवश्यक संशोधन करे : डॉ. कंवलजीत कौ

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चंडीगढ़:   विभिन्न देशों की धार्मिक संस्थाओं की अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि संस्था ग्लोबल सिख काउंसिल ने श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज को एक पत्र भेजकर “जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) कानून 2026” में तत्काल संशोधन सुनिश्चित करने के लिए पंथक हस्तक्षेप की मांग की है। काउंसिल ने इस पत्र की प्रतियां पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तथा मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को भी भेजते हुए विश्वभर के सिखों की भावनाओं के अनुरूप तत्काल विधायी कार्यवाही की मांग की है।
किसी दोषी द्वारा जानबूझकर की जाने वाली बेअदबी के विरुद्ध कठोर दंड की व्यवस्था को उचित ठहराते हुए काउंसिल की प्रधान डॉ. कंवलजीत कौर ने अपने पत्र में कहा है कि संशोधित अधिनियम में अनेक गंभीर कमियां हैं जो उस बुराई जितनी ही पीड़ा सिख समुदाय को दे सकती हैं जिसे समाप्त करने के उद्देश्य से यह कानून लाया गया है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल सिख काउंसिल की सबसे गंभीर चिंता यह है कि यह अधिनियम श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ करने, संरक्षण करने तथा सेवा-संभाल करने वालों के विरुद्ध पुलिस को मामला दर्ज करते समय सिख रहित मर्यादा की व्याख्या करने का अधिकार स्पष्ट रूप से देता है जो सिखों के धार्मिक मामलों में सीधा और असंवैधानिक हस्तक्षेप है तथा जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। काउंसिल ने स्पष्ट कहा है कि सिख रहित मर्यादा की व्याख्या करना केवल श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्ण अधिकार क्षेत्र में आता है।
उन्होंने आगे कहा कि यह अधिनियम ग्रंथियों, सेवादारों, गुरुद्वारा प्रबंधकों तथा गुरुद्वारों या अपने घरों में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करने या अखंड पाठ करवाने वाले परिवारों को भी वास्तविक बेअदबी करने वाले व्यक्ति के समान अपराधी बनाकर असुरक्षित करता है तथा ऐसे निर्दोष श्रद्धालुओं को न्यायालयों में अपनी बेगुनाही सिद्ध करने के लिए मजबूर करता है। इससे सिखों में स्थायी भय का वातावरण उत्पन्न होगा और लोग अपने घरों में प्रतिदिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करने या अखंड पाठ करवाने से भी हिचकिचाने लगेंगे।
ग्लोबल सिख काउंसिल की प्रधान ने इस संशोधित अधिनियम के कारण उत्पन्न अन्य चिंताओं का भी उल्लेख किया है जिनमें बेअदबी किए गए स्वरूपों को पुलिस द्वारा अदालती कार्यवाही के लिए ‘वाद सामग्री’ के रूप में कब्जे में लेना, पुलिस जांच एवं न्यायिक विज्ञान परीक्षण के दौरान गुरमत मर्यादा का पालन, बेअदबी रोकने के दौरान गुरु की रक्षा करने वालों के लिए विधिक सुरक्षा का अभाव, इस अधिनियम के दुरुपयोग के विरुद्ध पर्याप्त सुरक्षा प्रबंधों के बिना झूठे मामले दर्ज होने का खतरा तथा कठोर दंड के बावजूद शीघ्र न्याय के लिए त्वरित न्यायालयों की व्यवस्था न होना शामिल है।
काउंसिल ने श्री अकाल तख्त साहिब से अपील की है कि वह पंजाब सरकार को स्पष्ट आदेश जारी करे कि सिख विद्वानों, संवैधानिक विशेषज्ञों और पंथक संस्थाओं, जिनमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तथा श्री अकाल तख्त साहिब शामिल हैं, के साथ मिलकर परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से तुरंत व्यापक संशोधन किए जाएं ताकि उपरोक्त वास्तविकताओं के मद्देनजर विश्वभर के सिखों की चिंताओं और भावनाओं का सम्मानपूर्वक समाधान किया जा सके।   (हरमिंदर सिंह नागपाल  की रिपोर्ट)

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