‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ मोहाली में 1200 से ज्यादा अलॉटी खा रहे हैं गमाडा के धक्के: 450 करोड़ का गबन
पंजाब रेरा द्वारा समर्थित प्रोजेक्ट को 2020 में अलॉट करने का वादा था, 6 वर्ष से अलोटी ग्माडा और बिल्डर के बीच में भटक रहे हैं
मोहाली /चंडीगढ़ : वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मोहाली, के बिल्डर ने आम लोगों की मेहनत और खून-सीने की कमाई को खुलेआम लूटकर उनसे अरबों रुपये ठग लिए, जिनकी गमाडा से मिलीभगत के कारण करीब 1200 अलॉटी परेशान हैं और अलॉटीओं का आरोप है कि उनसे 70 से 100 फीसदी रकम वसूल ली गई है लेकिन प्रोजैकट का सिर्फ ढांचा ही खड़ा दिख रहा है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अमरजीत सिंह वालिया ने कहा, “क्योंकि गमाडा सीधे तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की देखरेख में है और इसलिए हमें उम्मीद है कि हमें जल्द ही न्याय मिलेगा। “
कल मोहाली प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बोलते हुए, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, चंडीगढ़ (मोहाली) अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट वालिया और वाइस प्रेसिडेंट ए.के. मेहता ने कहा कि करीब 1200 अलॉटीज से इकट्ठा किए गए 432 करोड़ रुपये का कथित तौर पर ऊपर बताए गए बिल्डर ने गबन कर लिया है और भरोसा दिया गया था कि वह 2020 में प्लॉट का कब्जा दे देगा, लेकिन आज 6 साल बीत जाने के बावजूद यह ठंडे बस्ते में पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि गमाडा ने अप्रैल 2023 में यह साइट वापस ले ली थी और रेरा ने 2024 में इसे कैंसल कर दिया था। अभी तक गमाडा ने इन्वेस्टर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए कोई पक्का एक्शन नहीं लिया है। अलॉटीज ने प्रेस को बताया कि अगर गमाडा यह प्रोजेक्ट 2023 में पूरा नहीं होने पर रद कर दिया है, तो गमाडा के कहने पर सैकड़ों अलॉटीज द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये किससे वापस मांगे जाएं, क्योंकि गमाडा ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए हैं। जबकि मोहाली, चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि नोएडा में भी लोगों के अरबों रुपये हड़पने वाले बिल्डर को ईडी ने करीब 10 महीने पहले गिरफ्तार कर लिया है।
इस केस को 2015 में गमाडा ने डब्ल्यूटीसी चंडीगढ़ (मोहाली) प्रोजेक्ट के तहत 132 करोड़ रुपये में नीलाम किया था। लेकिन डेवलपर कंपनी ‘डब्ल्यूटीसी नोएडा डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ की नाकामी के कारण यह प्रोजेक्ट एक दशक से भी ज्यादा समय से रुका हुआ है, जिसका खामियाजा इस प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाने वाले सैकड़ों आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। 8 एकड़ एरिया में फैले इस प्रोजेक्ट में सिर्फ नाम के स्ट्रक्चर बनाकर लोगों के करोड़ों रुपये हड़पे गए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि एयरपोर्ट रोड पर इस अधूरे प्रोजेक्ट में पूर्व सैनिकों, रिटायर्ड पब्लिक सेक्टर प्रोफेशनल्स और छोटे व्यापारियों समेत 1200 से ज्यादा परिवारों की जिंदगी भर की कमाई फंसी हुई है। ज्यादातर अलॉटीज ने अपने बकाए का 70 से 100 फीसदी तक पेमेंट कर दिया है, फिर भी वे पजेशन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेरा कोर्ट द्वारा बार- बार समन जारी करने के बावजूद गमाडा कोई साफ स्टैंड पेश करने या अलॉटीज के अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रहा है।
एसोसिएशन के नेताओं ने पंजाब सरकार और गमाडा से तुरंत एक्शन लेने की मांग की है ताकि मौजूदा बिल्डर को प्रोजेक्ट पर किसी भी दावे या अधिकार से वंचित किया जा सके, दूसरे तरीकों से प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद के लिए रेरा एक्ट, 2016 का सेक्शन 8 लागू किया जाए, एक आर्थिक रूप से मजबूत डेवलपर के साथ ट्रांसपेरेंट तरीके से रिवाइवल प्लान तैयार किया जाए, मौजूदा अलॉटमेंट एग्रीमेंट को बिना शर्त लागू किया जाए, काम की मॉनिटरिंग के लिए गमाडा, पंजाब रेरा और अलॉटीज की एक जॉइंट मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए।
इस मौक पर वाइस प्रेसिडेंट मनजीत सिंह, जनरल सेक्रेटरी नवनीत सिंह और लाइसेंस सेक्रेटरी तरसेम अमरजीत भी इस मौके पर मौजूद थे।
Comments are closed.