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देश में डीमैक तकनीक से एक आंख से दो कार्निया प्रत्यारोपित की जा रही है : डॉ पुरोहित

नेत्रदान करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम है, अधिक जागरूकता और सामाजिक संकल्प की आवश्यता है।

हमारे सामुदायिक स्वास्थ्य विषेषज्ञ *डॉ नरेश पुरोहित (सलाहकार, राष्ट्रीय हॉस्पिटल प्रबंधन एसोसिएशन), द्वारा अति लाभकारी रहस्योद्घाटन !

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भोपाल : मृत्यु के बाद नेत्रदान करने वाला एक व्यक्ति चार लोगों को रोशनी दे सकता है। पहले दोनों आंखों से केवल दो ही कार्निया मिलती थीं, लेकिन अब देश में नई तकनीक आने के बाद से एक आंख से दो कार्निया प्रत्यारोपित की जा रही हैं। डीमैक  (डेसीमेट मेम्ब्रेन एंडोथेलियल केराटोप्लास्टी) तकनीक से यह प्रत्यारोपण होता है। यह जानकारी राष्ट्रीय अंधत्व और दृष्टिबाधितता नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने  विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय  द्वारा आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम मे देते हुए बताया  कि कॉर्निया प्रत्यारोपण चिकित्सा विज्ञान की सबसे सफल प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं में से एक है, जिसकी सफलता दर 95 से 98 प्रतिशत तक मानी जाती है। इसके बावजूद देश में आवश्यकता की तुलना में उपलब्ध कॉर्निया की संख्या बहुत कम है।

मुख्य वक्ता चिकित्साविद् डॉ पुरोहित ने अपने उद्‌बोदन मे बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में करोड़ों लोग दृष्टिबाधिता और अंधता से प्रभावित हैं। भारत में भी लाखों लोग कॉर्निया संबंधी रोगों के कारण दृष्टि खो चुके हैं। विशेष चिंता की बात यह है कि कॉर्निया की खराबी से होने वाली अंधता के अनेक मामलों का उपचार संभव है, किंतु पर्याप्त नेत्रदान न होने के कारण लाखों मरीज वर्षों तक प्रतीक्षा सूची में बने रहते हैं।
उन्होने बताया कि हर वर्ष लाखों लोगों को कॉर्निया की जरूरत होती है, लेकिन दान की संख्या अपेक्षाकृत बहुत कम रहती है। यह स्थिति बताती है कि समस्या चिकित्सा संसाधनों की नहीं, बल्कि जागरूकता और  सामाजिक संकल्प की है।
कार्यक्रम में कई चिकित्सका कर्मी एवं नर्सिग छात्राओ ने भाग लिया।


*डॉ नरेश पुरोहित- एमडी, डीएनबी , डीआई एच , एमएचए, एमआरसीपी (यूके) एक महामारी रोग विशेषज्ञ हैं। वे भारत के राष्ट्रीय संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार हैं। मध्य प्रदेश एवं दूसरे प्रदेशों की सरकारी संस्थाओं में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम , राष्ट्रीय पर्यावरण एवं वायु प्रदूषण के संस्थान के सलाहकार हैं। एसोसिएशन ऑफ किडनी केयर स्ट्डीज एवं हॉस्पिटल प्रबंधन एसोसिएशन के भी सलाहकार हैं।

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