NCERT की किताब में जैसलमेर पर विवादित दावा, मचा बवाल

NCERT में जैसलमेर पर विवादित दावा

पूर्व राजपरिवार ने बताया इतिहास से छेड़छाड़, जनभावनाओं को ठेस….

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जैसलमेर – शिक्षा की आधारशिला मानी जाने वाली NCERT की एक नई किताब में जैसलमेर को मराठा साम्राज्य का हिस्सा बताया गया है। इस दावे ने न केवल इतिहासकारों को चौंका दिया है, बल्कि जैसलमेर के पूर्व राजपरिवार सहित स्थानीय नागरिकों की भावनाओं को भी आघात पहुंचाया है।

पूर्व राजपरिवार के सदस्य चैतन्यराज सिंह ने इस विवादास्पद विवरण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि “यह हमारे पूर्वजों के बलिदान और संघर्ष को धूमिल करने का प्रयास है। जैसलमेर का इतिहास स्वाभिमान, आत्मबल और वीरता की मिसाल रहा है। इसे मराठा साम्राज्य का हिस्सा बताना न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है, बल्कि यह जनभावनाओं के साथ अन्याय भी है।”

चैतन्यराज सिंह ने आगे कहा कि राजपूताना के अनेक छोटे-बड़े राज्य, विशेष रूप से जैसलमेर, अपने स्वराज और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे। जैसलमेर का प्रशासन, सैन्य नीति और सामाजिक ढांचा मराठा प्रभाव से अलग और स्वतंत्र था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह NCERT द्वारा की गई गंभीर ऐतिहासिक भूल है, जिसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।

स्थानीय इतिहासकारों ने भी इस कथन को तथ्यहीन करार दिया है। प्रोफेसर रघुनाथ सिंह, जो कि राजस्थान के इतिहास पर वर्षों से शोध कर रहे हैं, कहते हैं, “जैसलमेर ने कभी भी मराठा अधीनता को स्वीकार नहीं किया। यह स्पष्ट रूप से स्वतंत्र राज्य रहा, जिसने मुगलों से लेकर ब्रिटिशों तक, सभी के साथ अपने सम्मानजनक रिश्ते बनाए।” शहर के लोगों में भी इस विषय को लेकर काफी आक्रोश है। कई संगठनों ने NCERT से इस गलती को तुरंत सुधारने की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी यह विषय तेजी से वायरल हो रहा है और ‘#HistoryMatters’ तथा ‘#RespectJaisalmer’ जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

इस बीच, NCERT की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे असंतोष और भी बढ़ रहा है। शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूली किताबों में ऐतिहासिक तथ्यों की सटीकता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं किताबों से नई पीढ़ी देश के इतिहास को समझती है।

जैसलमेर के लोग अब इस लड़ाई को केवल एक किताब की गलती नहीं, बल्कि अपनी अस्मिता और इतिहास की रक्षा का विषय मान रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि NCERT इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर आवश्यक सुधार करेगा, ताकि भविष्य में बच्चों को इतिहास का सही और तथ्यात्मक ज्ञान मिल सके।

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