फिरोजपुर की सेना हवाई पट्टी में फर्जीवाड़ा…
तीन युद्धों में इस्तेमाल हुई हवाई पट्टी को फर्जी दस्तावेज़ों के ज़रिए बेचने का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, विजिलेंस जांच के आदेश जारी…
चंडीगढ़ : पंजाब के फिरोजपुर जिले में स्थित भारतीय सेना की ऐतिहासिक हवाई पट्टी को फर्जीवाड़े के जरिए बेचने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह हवाई पट्टी देश की रक्षा के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण रही है और इसका उपयोग भारत ने 1965, 1971 और 1999 के तीन प्रमुख युद्धों के दौरान किया था। अब इस जमीन को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जिस पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की जांच विजिलेंस विभाग से कराई जाए। कोर्ट ने पूछा है कि कैसे एक ऐसी संपत्ति, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है, उसे कुछ निजी व्यक्तियों द्वारा फर्जी दस्तावेज़ बनाकर बेचा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका इस घोटाले में कितनी रही है।
बताया जा रहा है कि कुछ स्थानीय व्यक्तियों ने इस जमीन को निजी संपत्ति बताकर रजिस्ट्री करवाई और आगे इसे बेच दिया। यह जमीन दशकों से भारतीय सेना के नियंत्रण में थी और इसका स्पष्ट उल्लेख सरकारी अभिलेखों में भी मौजूद है। बावजूद इसके, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इस जमीन की बिक्री हो गई।
इस मामले का खुलासा एक आरटीआई कार्यकर्ता की जांच से हुआ, जिसने दस्तावेज़ जुटाकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार की घटनाएं न सिर्फ सरकारी संपत्तियों पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।
अब यह देखना होगा कि विजिलेंस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और दोषियों पर किस तरह की कार्रवाई होती है। यह मामला न सिर्फ जमीन के फर्जीवाड़े का है, बल्कि इसमें सरकारी तंत्र की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।
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