प्रदेश मे कम उम्र में दिल के दौरे के बढ़ते मामले चिंता का विषयः डॉ. पुरोहित
हमारे सामुदायिक स्वास्थ्य विषेषज्ञ, प्रसिद्ध चिकित्साविद एवं प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ *डॉ नरेश पुरोहित, के अनुसार बढ़ते प्रदूषण और बदलती जीवनशैली हृदय के स्वास्थ्य को खतरों का कारण बन रहे हैं.
भोपाल: कार्डियोवास्कुलर साइंसेज अकादमी के कार्यकारी सदस्य और प्रिवेंटिव कार्डियो
लॉजी विशेषज्ञ डॉ नरेश पुरोहित ने सोमवार को कहा कि प्रदेश में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों के बीच कम उम्र में दिल के दौरे के मामले सामने आना चिंता का विषय है।
जाने माने शोधार्थी डॉ. पुरोहित ने हाल ही में एशियन जर्नल ऑफ कार्डियोलोजी में ‘जानलेवा बन रहा है हृदय रोग’ शीर्षक से प्रकाशित अपनी ताजा शोध अध्ययन रिपोर्ट मे लेखांकित करते हुए बताया कि ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और बदलती जीवनशैली का प्रभाव हृदय के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। गौरतलब है कि 40 वर्ष से कम उम्र में हृदय संबंधी समस्या लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में नशे की आदत, मानसिक तनाव, कम नींद और खराब खान-पान जैसे कारण बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने पर्यावरण और हृदय रोगों के बीच बढ़ते संबंध पर चिंता जताई। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, तापमान में बदलाव और बढ़ता प्रदूषण हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रहा है।
उन्होंने हालिया अमेरिकी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2050 तक कार्डियोवास्कुलर रोग के मामलों में तीन गुना तक वृ
द्धि होने की आशंका जताई गई है। प्रदूषण करीब 25 प्रतिशत हार्ट डेथ से जुड़े कारकों में शामिल हो गया है। प्रदूषण से कोई नई बीमारी पैदा होने की बात नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इससे हार्ट अटैक, धड़कन में गड़बड़ी, हार्ट फेल्योर और अचानक होने वाली मौत के मामलों को लेकर चिंता बढ़ी है।
इसके अलावा लगातार बढ़ता मानसिक तनाव भी युवाओं के दिल पर असर डाल रहा है।
शोध रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के प्रमुख शहरो इंदौर, भोपाल, जबलपुर एंव उज्जैन में पिछले 15-20 वर्षों में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा गया कि ये शहर तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदल रहे है। पर्यावरण में बदलाव और बढ़ते प्रदूषण का असर केवल हृदय तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। शहरी आबादी को हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों से बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में हृदय रोगों का कोई पूर्ण और व्यापक डेटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर करीब छह प्रतिशत ग्रामीण और 10 से 12 प्रतिशत शहरी आबादी में ऐसी हृदय संबंधी बीमारी होने का अनुमान बताया गया, जिससे दिल के दौरे का खतरा हो सकता है। इनमें कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज से जुड़ी बीमारियां प्रमुख हैं। हार्ट फेल्योर को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है।
उन्होने बताया कि हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान में भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने सफेद चीनी, अधिक मिठाई, मैदा और अत्यधिक रिफाइंड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने की सलाह दी है। खाने में मोटे अनाज, साबुत अनाज, दाल और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने पर जोर दिया गया। प्रोटीन के लिए मछली और चिकन जैसे विकल्पों का उल्लेख किया गया, जबकि रेड मीट से बचने की सलाह दी गई। समोसे, चिप्स और अन्य तले हुए खाद्य पदार्थों में बार-बार गर्म किए गए तेल के इस्तेमाल से बचना चाहिए। ऑलिव ऑयल और
अलसी के तेल जैसे विकल्पों का भी उल्लेख किया।
डॉ पुरोहित ने कहा कि तनाव, नशा, कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी का संयोजन कम उम्र में हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकता है। कई युवा रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं और उनकी औसत नींद छह घंटे तक भी नहीं पहुंच रही है।
उन्होने बताया कि हृदय रोगों के इलाज में पिछले दो-तीन दशकों में तकनीक तेजी से आगे बढ़ी है। अब कुछ उपयुक्त मरीजों में बिना स्थायी स्टेंट के भी एंजियोप्लास्टी संभव है। ड्रग-कोटेड बैलून के जरिए प्रभावित नस को चौड़ा कर वहां दवा पहुंचाई जाती है। वहीं, नसों में पथरी जैसी सख्त कैल्सिफिकेशन होने पर रोटाब्लेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें डायमंड-कोटेड उपकरण की मदद से कैल्सिफिकेशन को तोड़ा जाता है, जिसके बाद जरूरत के अनुसार एंजियोप्लास्टी की जाती है। इंट्रावास्कुलर इमेजिंग तकनीक के जरिए नस के अंदर की स्थिति को अधिक स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है। इससे ब्लॉकेज की संरचना और स्टेंट की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है।
*डॉ नरेश पुरोहित- एमडी, डीएनबी , डीआई एच , एमएचए, एमआरसीपी (यूके) एक महामारी रोग
विशेषज्ञ हैं। वे भारत के राष्ट्रीय संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार हैं। मध्य प्रदेश एवं दूसरे प्रदेशों की सरकारी संस्थाओं में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम , राष्ट्रीय पर्यावरण एवं वायु प्रदूषण के संस्थान के सलाहकार हैं। एसोसिएशन ऑफ किडनी केयर स्ट्डीज एवं हॉस्पिटल प्रबंधन एसोसिएशन के भी सलाहकार हैं।
