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चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव शर्मा का भाजपा नेता संजय टंडन पर जवाबी हमला

कहा: 'भाजपा के संजय टंडन ‘भ्रम रोग’ के शिकार – लोकतांत्रिक जनादेश को स्वीकार करने के लिए 24 महीने पर्याप्त होते हैं'

केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ नगर निगम को उसका वैध हिस्सा (वित्तीय ) नहीं दिया जा रहा

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चंडीगढ़:   प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता राजीव शर्मा ने आज भाजपा नेता संजय टंडन द्वारा चंडीगढ़ के सम्मानित सांसद मनीष तिवारी के खिलाफ किए जा रहे बेबुनियाद और हताशापूर्ण हमलों का कड़ा जवाब दिया।

राजीव शर्मा ने कहा कि सांसद मनीष तिवारी के खिलाफ झूठ फैलाने को लेकर संजय टंडन की लगातार जिद राजनीतिक “भ्रम रोग”   का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ की जनता ने 4 जून 2024 को अपना फैसला सुना दिया था और 24 महीने टंडन के लिए अपनी हार को स्वीकार करने तथा यह आत्ममंथन करने के लिए पर्याप्त थे कि आखिर शहर की जनता ने उन्हें क्यों नकार दिया। लेकिन इसके बजाय वे बदनाम करने और झूठे आरोप लगाने का रास्ता चुन रहे हैं, जो एक असफल राजनेता का अंतिम सहारा होता है।

शर्मा ने टंडन पर चंडीगढ़ के लोगों के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर स्थानीय सांसद द्वारा लोगों को राहत देने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने और व्यवस्था में सुधार लाने के प्रयासों में लगातार बाधाएं उत्पन्न करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब संजय टंडन भाजपा के शहरी अध्यक्ष थे, तब उन्होंने कुछ नहीं किया, जबकि उनकी अपनी पार्टी चंडीगढ़ को बेरहमी से लूट रही थी। जब भाजपा के मेयरों ने व्यावसायिक संपत्ति कर को दोगुना और आवासीय संपत्ति कर को तीन गुना कर दिया तथा लोगों पर असहनीय आर्थिक बोझ डाल दिया, तब टंडन चुप रहे। जब 24×7 जलापूर्ति योजना लोगों के लिए दिनदहाड़े लूट का प्रतीक बन गई, जिसके कारण शहरवासियों पर 450 करोड़ रुपये से अधिक का अनावश्यक कर्ज लाद दिया गया और हर वर्ष पानी के शुल्क में 5 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की गई, तब भी टंडन ने कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने बाहरी कंपनियों को सफाई के ठेके दिए जाने और पार्किंग शुल्क के नाम पर लोगों पर बोझ डालने के मामले में भी चुप्पी साधे रखी। शर्मा ने कहा कि ‘यह केवल चुप्पी नहीं थी, बल्कि स्पष्ट साझेदारी थी।’

शर्मा ने कहा कि शहरी भारत का गौरव रही चंडीगढ़ नगर निगम को भाजपा के एक दशक के कुशासन, भ्रष्टाचार और आपराधिक कुप्रबंधन ने दिवालियापन के कगार पर पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना आज भी एक टूटा हुआ और छलावे से भरा वादा बनी हुई है। यहां तक कि जब मनीष तिवारी ने लोकसभा में मेट्रो को लेकर विस्तृत प्रश्न पूछकर जवाबदेही की मांग की, तब केंद्रीय राज्य मंत्री ने केवल एक शब्द में उत्तर दिया, जिससे यह साबित हो गया कि टंडन और भाजपा पिछले दस वर्षों से चंडीगढ़ के लोगों को मेट्रो के मुद्दे पर गुमराह कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा के प्रभारी के रूप में टंडन ने उस राज्य को उसके वैध अधिकारों से वंचित रखने में भी भूमिका निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान को 11,000 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 3,700 करोड़ रुपये तक लाने में टंडन की भूमिका रही। इसके अलावा, जब हिमाचल प्रदेश भीषण बाढ़ का सामना कर रहा था, तब भी उन्होंने केंद्र सरकार को पर्याप्त राहत न देने के लिए प्रभावित किया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा और यूटी प्रशासन, दोनों के समक्ष चंडीगढ़ के हर मुद्दे को पूरी प्रतिबद्धता के साथ उठाया है। उन्होंने मेट्रो परियोजना, यातायात प्रबंधन, हाउसिंग बोर्ड फ्लैट मालिकों की 12 वर्ष पुरानी लंबित समस्याओं, सहकारी हाउस बिल्डिंग सोसायटियों के मुद्दों, गांवों की लाल डोरा नियमितीकरण, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने, टेनामेंट्स और पुनर्वास कॉलोनियों के स्वामित्व अधिकारों तथा नगर निगम के वित्तीय संकट सहित अन्य जनहित के मुद्दों को संसद में उठाया है।

उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए, कहा कि नगर निगम को उसका वैध हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। जहां नगर निगम को 1,700 से 1,800 करोड़ रुपये मिलने चाहिए, वहीं उसे केवल 570 से 580 करोड़ रुपये ही दिए जा रहे हैं। यह वित्तीय उपेक्षा नगर निगम को दिवालियापन के कगार तक ले आई है।

अंत में शर्मा ने कहा कि चंडीगढ़ की जनता को धोखा नहीं दिया जा सकता। टंडन के बयानों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वे भली-भांति जानते हैं कि उन्हें किसने लूटा और उनके लिए कौन लड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी ने टंडन को सलाह दी है कि वे अपना “भ्रम रोग” का इलाज करवा लें, इससे पहले कि वे स्वयं को और अधिक शर्मिंदा करें।                                      (हरमिन्दर नागपाल की रेपोर्ट)

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