कारगिल विजय दिवस पर चंडीगढ़ में देशभक्ति की दौड़
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कारगिल दिवस पर दौड़ा चंडीगढ़, जोश में उमड़ा जनसैलाब

साजोबा मैराथन में शामिल हुए सैकड़ों लोग, जुंबा डांस से बढ़ा उत्साह, सुबह 5 बजे हुई शुरुआत….

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चंडीगढ़ कारगिल विजय दिवस के मौके पर शनिवार सुबह चंडीगढ़ के लोगों ने देशभक्ति और फिटनेस के जज्बे को एक साथ जी लिया। साजोबा मैराथन के रूप में यह आयोजन न सिर्फ एक दौड़ था, बल्कि शहीदों को श्रद्धांजलि और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल भी थी। सुबह 5 बजे जैसे ही सूरज की किरणें हल्के-हल्के आसमान में फैलने लगीं, वैसे ही शहर की सड़कों पर कदमों की आवाज गूंजने लगी — ये आवाज थी उन लोगों की, जो सिर्फ दौड़ने नहीं, बल्कि देश के नाम कुछ पल समर्पित करने आए थे।

इस आयोजन की शुरुआत ज़ुंबा डांस से हुई, जिसने प्रतिभागियों में जोश और ऊर्जा भर दी। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा और बुजुर्ग — सभी एक साथ थिरकते दिखे, और वातावरण पूरी तरह देशभक्ति और उमंग से सराबोर हो गया। ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला) ही नहीं, आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। कोई दौड़ में हिस्सा लेने आया था, तो कोई परिवार के साथ शहीदों की स्मृति में यह पल साझा करने। कई प्रतिभागियों ने चेहरे पर तिरंगा पेंट कराया था, कुछ ने “जय हिंद” की पट्टियां पहनी थीं।

दौड़ की रेखा सिर्फ शरीर की ताकत नहीं, बल्कि दिलों में देश के प्रति सम्मान को माप रही थी। प्रतिभागियों की आंखों में एक चमक थी — देश के लिए कुछ कर दिखाने की भावना। कुछ लोग तेज़ी से दौड़ते रहे, तो कुछ धीमे कदमों से चलते हुए इस पल को जीते रहे।

इस आयोजन में सुरक्षा और सुविधा का भी खास ध्यान रखा गया था। रिफ्रेशमेंट स्टॉल, मेडिकल सहायता, पानी की व्यवस्था और मार्गदर्शन के लिए वालंटियर्स हर जगह तैनात थे। आयोजनकर्ताओं ने बताया कि साजोबा मैराथन का उद्देश्य युवाओं को प्रेरित करना और कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों को नमन करना था। मैराथन खत्म होने के बाद भी लोगों के चेहरे पर मुस्कान थी। थकावट थी, पर संतोष भी था — क्योंकि ये दौड़ सिर्फ शरीर की नहीं, आत्मा की थी। कारगिल विजय दिवस की इस विशेष मैराथन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब बात देश के सम्मान की हो, तो चंडीगढ़ पीछे नहीं रहता।

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