ईडी का शिकंजा: तीन शेल कंपनियों के 135 खाते फ्रीज, 204 करोड़ की रकम जब्त
नोएडा, लखनऊ, रोहतक समेत कई शहरों में छापेमारी, फर्जी निदेशकों के ज़रिए चल रही थीं कंपनियां
चंडीगढ़ से शुरू हुई ईडी की इस बड़ी कार्रवाई ने फर्जीवाड़े की उस परत को उजागर किया है, जो देश के कई शहरों में फैली हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीन ऐसी शेल कंपनियों के खिलाफ शिकंजा कसा है, जो खुद को आईटी कंपनियों के रूप में प्रस्तुत कर रही थीं। इन कंपनियों के नाम पर कुल 135 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है और अब तक 204 करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि जब्त की जा चुकी है।
जांच में सामने आया है कि ये कंपनियां असल में कुछ फर्जी निदेशकों के नाम पर संचालित की जा रही थीं। ये लोग डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशंस, यूपीआई सेवाओं और अन्य तकनीकी सेवाओं की आड़ में हवाला और संदिग्ध लेन-देन में शामिल थे। ईडी ने नोएडा, लखनऊ, रोहतक, गुरुग्राम, और दिल्ली एनसीआर समेत कई शहरों में एक साथ छापेमारी की और डिजिटल डेटा, दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल उपकरण जब्त किए।
सूत्रों के मुताबिक, ये कंपनियां दिखावे के तौर पर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और डिजिटल सॉल्यूशंस देने का दावा करती थीं, लेकिन असलियत में इनका मकसद सिर्फ पैसों का फर्जी ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग करना था। कुछ खातों में तो ऐसे लेन-देन मिले हैं जिनका स्रोत स्पष्ट नहीं है और जो करोड़ों की राशि में हैं।
इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ है कि ऐसे फर्जी नेटवर्क न सिर्फ टेक्नोलॉजी की आड़ ले रहे हैं बल्कि आम उपभोक्ताओं के साथ विश्वासघात भी कर रहे हैं। ईडी ने बताया कि आगे की जांच में और भी कंपनियां इस जाल में शामिल हो सकती हैं। साथ ही फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) और आयकर विभाग को भी इस मामले की जानकारी दे दी गई है ताकि व्यापक स्तर पर फर्जी कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया जा सके।
इस जांच से यह बात एक बार फिर सामने आई है कि डिजिटल क्रांति के युग में जहां तकनीक सुविधाएं दे रही है, वहीं अपराधियों ने इसे अपने फायदे का हथियार भी बना लिया है। ईडी की कार्रवाई आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।
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