अपने अधिकारों को जानें: स्थायी लोक अदालत से मिलता है त्वरित और सुलभ न्याय
चंडीगढ़ : स्थायी लोक अदालत (जन उपयोगी सेवाएं), केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के तत्वावधान में राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-43, चंडीगढ़ में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को स्थायी लोक
अदालत (जन उपयोगी सेवाएं), यू.टी. चंडीगढ़ की कार्यवाहक अध्यक्ष सुश्री रूनम कौशिक तथा सदस्य सुश्री सुरजीत कौर ने संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों और विद्यालय के स्टाफ को स्थायी लोक अदालत की भूमिका एवं कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी।
वक्ताओं ने बताया कि स्थायी लोक अदालत बिजली, पानी, परिवहन, दूरसंचार, बीमा, स्वच्छता तथा अस्पताल एवं औषधालय जैसी आवश्यक जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के समाधान के लिए एक सुलभ वैधानिक मंच प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि स्थायी लोक अदालत सबसे पहले आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से विवाद का समाधान करने का प्रयास करती है। यदि समझौता नहीं हो पाता, तो कानून के अनुसार विवाद का गुण-दोष के आधार पर निर्णय भी किया जा सकता है। यह व्यवस्था नागरिकों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलताओं से बचाते हुए पात्र मामलों में त्वरित, किफायती और प्रभावी न्याय प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि स्थायी लोक अदालत द्वारा दिया गया निर्णय (अवार्ड) कानून के अधीन अंतिम होता है तथा संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है। इस निर्णय का प्रभाव सिविल न्यायालय की डिक्री के समान होता है।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों को स्थायी लोक अदालत के बारे में जागरूक करें, ताकि आवश्यक जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित समस्याओं का सामना करने पर नागरिकों को यह जानकारी हो कि वे न्याय प्राप्त करने के लिए कहां संपर्क कर सकते हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और विद्यालय के स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा संवाद के माध्यम से स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था—अपने अधिकारों को जानें, उनके समाधान के उपायों को समझें और समय पर न्याय प्राप्त करें। (हरमिंदर नागपाल की रिपोर्ट)
