अरावली सफारी प्रोजेक्ट पर हरियाणा सरकार असमंजस में
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अरावली सफारी प्रोजेक्ट पर सरकार की उलझन

खट्टर सरकार का सपना अधर में लटका, संचालन खर्च ने बढ़ाई चिंता…..

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हरियाणा : के अरावली क्षेत्र में प्रस्तावित दुनिया की सबसे बड़ी जंगल सफारी अब सरकारी दुविधा का कारण बन गई है। यह प्रोजेक्ट पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है, जिसे बड़े पैमाने पर पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के लिए शुरू किया गया था। लेकिन अब जब परियोजना अपने अमल की कगार पर पहुंची है, सरकार उसके संचालन और खर्चों को लेकर उलझन में पड़ गई है।

इस जंगल सफारी की परिकल्पना अत्याधुनिक तकनीक, कृत्रिम और प्राकृतिक आवासों, दुर्लभ वन्यजीवों और एक भव्य पर्यावरणीय अनुभव के साथ की गई थी। इसकी लागत अनुमानित रूप से सैकड़ों करोड़ों में बताई जा रही है और भविष्य में इसके रखरखाव तथा संचालन पर भारी भरकम राशि खर्च करनी होगी। इसी मुद्दे पर मौजूदा सरकार सोच-विचार में पड़ गई है कि क्या इसे निजी साझेदारी में चलाया जाए या पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रखा जाए।

सरकार के उच्च अधिकारियों और पर्यावरण विभाग के बीच इस पर कई बैठकों का दौर चल चुका है। एक ओर यह प्रोजेक्ट राज्य के लिए पर्यटन और निवेश के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकता है, वहीं दूसरी ओर खर्च की संभावित चुनौती इसके रास्ते में रोड़ा बनकर खड़ी है। अगर इसे सफलतापूर्वक शुरू किया जाता है, तो यह न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर हरियाणा की एक अलग पहचान बना सकता है।

वहीं, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना से अरावली की पारिस्थितिकी पर विपरीत असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि परियोजना पूरी तरह से इको-फ्रेंडली रहेगी और इसमें किसी भी प्रकार का पारिस्थितिक नुकसान नहीं होगा।

अब देखना यह होगा कि सरकार इस मेगा प्रोजेक्ट को कैसे आगे बढ़ाती है। क्या यह जंगल सफारी हरियाणा के लिए विकास का नया द्वार खोल पाएगी या कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगी।

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