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होलिका-दहन 2026 : शास्त्रमतानुसार स्पष्ट एवं अंतिम निर्णय: आचार्य रोहित शास्त्री

होलिका दहन भगवान विष्णु द्वारा अपने भगत प्रहलाद की रक्षा के निमित्त नरसिंह अवतार ले कर हिरण्यकश्यप वध का प्रसंग है। मंगलवार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन के उचित समय एवं मुहूर्त पर दिल्ली के प्रसिद्ध ज्योतिषी, आचार्य रोहित शास्त्री द्वारा विशेष लेख

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नई दिल्ली: वर्ष 2026 में होलिका-दहन की तिथि को लेकर विभिन्न स्थानों पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। कहीं 2 मार्च सायंकाल का उल्लेख किया जा रहा है, तो कहीं 3 मार्च की चर्चा है। कुछ स्थानों पर भद्रा-दोष तथा ग्रहण के कारण संशय और बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि शास्त्र, तिथि, भद्रा-विचार तथा ग्रहण — इन सभी का सम्यक् परीक्षण कर शास्त्रमत के अनुसार स्पष्ट निर्णय प्रस्तुत किया जाए।
📜 शास्त्रीय विधान क्या कहता है?
धर्मशास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि —
होलिका-दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्रा-दोष से रहित समय में किया जाना चाहिए।
यदि प्रदोषकाल में भद्रा उपस्थित हो तथा भद्रा निशीथ (अर्धरात्रि) के पश्चात समाप्त हो रही हो, तो शास्त्रवचन है —
“निशीथोत्तर भद्रासमाप्तौ भद्रामुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव।”
अर्थात् भद्रा के मुख (अशुभ प्रारंभिक भाग) का त्याग कर भद्रा के शुद्ध भाग में ही होलिका-दहन करना चाहिए।
📅 तिथि की वास्तविक स्थिति (2026)
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 2 मार्च 2026 को विद्यमान है।
पूर्णिमा तिथि 3 मार्च 2026 प्रातः लगभग 7:32 बजे समाप्त हो जाती है।
अतः 3 मार्च के सायंकाल या प्रदोषकाल में पूर्णिमा तिथि नहीं रहेगी। इसलिए उस समय होलिका-दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
🌙 भद्रा की स्थिति
2 मार्च 2026 को भद्रा काल विद्यमान रहेगा। भद्रा का मुख (अशुभ भाग) शास्त्रमतानुसार त्याज्य माना गया है।
शास्त्रीय गणना के अनुसार —
🔹 भद्रा का शुद्ध पुच्छ काल
⏰ रात्रि 1:16 बजे से 2:25 बजे तक
(2 और 3 मार्च 2026 की मध्यरात्रि)
इसी काल में भद्रा-मुख का दोष नहीं रहता तथा यह समय शास्त्रमतानुसार होलिका-दहन के लिए स्वीकार्य एवं कल्याणकारी माना गया है।
🌑 3 मार्च को ग्रहण का विचार
3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण घटित हो रहा है। ग्रहण एवं सूतक काल में यज्ञ, हवन, दहन आदि शुभ संस्कार वर्जित माने गए हैं।
साथ ही पूर्णिमा प्रातः 7:32 बजे समाप्त हो जाती है — अतः 3 मार्च के सायंकाल में होलिका-दहन न तो पूर्णिमा में होगा और न ही ग्रहण-दोष से मुक्त होगा।
📌 शास्त्रमतानुसार अंतिम निर्णय
उपरोक्त तिथि, भद्रा एवं ग्रहण-विचार को ध्यान में रखते हुए —
🔥 होलिका-दहन — रात्रि 1:16 बजे से 2:25 बजे तक
(2 और 3 मार्च 2026 की मध्यरात्रि)
इसी समय भद्रा-पुच्छ स्थित है तथा भद्रा-मुख का दोष नहीं रहता। शास्त्रमतानुसार इसी रात्रि-मुहूर्त में होलिका-दहन करना श्रेष्ठ एवं धर्मसम्मत है।
श्रद्धालुजन संशय त्यागकर शास्त्रीय मर्यादा का पालन करें और होली का पावन पर्व श्रद्धा, संयम एवं मंगलभाव से मनाएँ।
📞 किसी भी प्रकार की ज्योतिषीय जानकारी, कुंडली विश्लेषण, पूजा-पाठ अथवा धार्मिक परामर्श हेतु संपर्क करें —आचार्य रोहित शास्त्री,                                                                                                                                                                                           📍 दिल्ली,
📱 8010004343. 

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  • होली भारतीय एवं सनातन संस्कृति का एक विशेष त्यौहार है, श्री कृष्ण द्वारा गोपियों के संग होली एवं रंगलीला एक पवित्र पर्व है,
    होली पर विशेष लेख कल आचार्य रोहित शास्त्री जी द्वारा मंगलवार प्रातः प्रस्तुत किया जाएगा  |
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