राजस्थान में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर
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राजस्थान में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर

अब तक 175 ध्वस्त, 205 भवन सील; हजारों पर कार्रवाई बाकी….

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जयपुर राजस्थान में जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जर्जर और खतरनाक भवनों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत अब तक 4276 जर्जर भवनों की पहचान की गई है, जिनमें से 175 को ध्वस्त किया जा चुका है और 205 भवनों को सील कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कई शहरों में पुराने मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे आम लोगों की जान-माल को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमों ने सभी जिलों में सर्वे के जरिए उन इमारतों की सूची तैयार की जो न केवल जर्जर हैं बल्कि आस-पास रहने वाले लोगों के लिए खतरे का कारण भी बन सकती हैं। सबसे ज्यादा खतरा उन भवनों से है जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित हैं और जिनमें लोग अभी भी रह रहे हैं या दुकानें चला रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन ने पहले नोटिस जारी किया, फिर कार्रवाई की।

इस अभियान में जयपुर, जोधपुर, कोटा और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में विशेष ध्यान दिया गया है। खासकर जयपुर शहर में सर्वाधिक संख्या में जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। यहां कई इलाके पुराने समय से आबाद हैं, जहां मकान अब बेहद कमजोर हो चुके हैं। कुछ जगहों पर मकान गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया भी मिली-जुली रही। कुछ लोग प्रशासन की इस कार्रवाई को सराह रहे हैं और इसे जनता की जान बचाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो वर्षों से इन मकानों में रह रहे थे और अचानक उन्हें खाली करने का आदेश मिलने से परेशान हैं। खासकर बुजुर्ग और अकेले रह रहे लोग इस बदलाव से चिंतित हैं, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह कदम जनहित में उठाया गया है और इसके लिए सभी नियमों का पालन किया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य है कि मानसून के दौरान होने वाली किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके। यही वजह है कि सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि जर्जर भवनों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जाए। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि वे स्वयं भी सतर्क रहें और यदि किसी भवन की स्थिति खतरनाक लगती है तो प्रशासन को तुरंत सूचित करें।

यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है क्योंकि अभी हजारों भवन ऐसे हैं जिनकी स्थिति जांची जानी बाकी है। सरकार और प्रशासन दोनों की प्राथमिकता आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

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