पीसी मोदी बने उपराष्ट्रपति चुनाव अधिकारी
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पीसी मोदी बनाए गए उपराष्ट्रपति चुनाव अधिकारी

निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, नियुक्ति पर उठे थे सवाल…..

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नई दिल्ली देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए अब तैयारियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग ने इस बार राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को लेकर जहां एक ओर संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे में कुछ सवाल भी उठने लगे हैं।

पीसी मोदी, जो पहले भारत के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष रह चुके हैं, अब राज्यसभा सचिवालय में बतौर महासचिव कार्यरत हैं। उन्हें प्रशासन और कानूनी प्रक्रियाओं का लंबा अनुभव है। लेकिन उनकी नियुक्ति के साथ ही कुछ पुराने विवाद और आरोप फिर चर्चा में आ गए हैं।

पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा के महासचिव को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया था। ऐसे में इस बार राज्यसभा महासचिव को यह जिम्मेदारी सौंपना कुछ हलकों में असामान्य माना जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं कि क्या यह चयन निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन करते हुए हुआ है या इसमें कोई राजनीतिक मंशा शामिल है। हालांकि निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि यह निर्णय संविधान और चुनावी नियमों के अनुरूप लिया गया है। पीसी मोदी का नाम तब भी चर्चा में आया था जब उन्हें CBDT का अध्यक्ष बनाया गया था। उस दौरान उन पर कुछ मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे थे, हालांकि उनके खिलाफ कोई न्यायिक सजा या ठोस प्रमाण नहीं आए।

उनकी कार्यशैली को लेकर कुछ लोगों ने उनकी प्रशंसा भी की है, खासकर कर सुधारों और करदाताओं की सुविधा बढ़ाने के प्रयासों को लेकर। लेकिन लोकतंत्र की पारदर्शिता में शक की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए यही कारण है कि चुनाव से पहले नियुक्ति से जुड़ी हर बात को लेकर लोगों की नजरें लगी हुई हैं।

अब जब पीसी मोदी इस संवेदनशील चुनाव प्रक्रिया के प्रमुख होंगे, ऐसे में उनकी भूमिका और निष्पक्षता पर पूरे देश की नजर रहेगी। उपराष्ट्रपति का चुनाव ना सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक प्रणाली की एक बड़ी कसौटी भी होती है। इस बार का चुनाव कब होगा, किस-किस पार्टी से उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे, यह सब अभी साफ नहीं है, लेकिन पीसी मोदी की मौजूदगी ने इस चुनाव को पहले से ही खास बना दिया है। अब देखना होगा कि वे इस जिम्मेदारी को कैसे निभाते हैं क्या वे पारदर्शिता और निष्पक्षता की कसौटी पर खरे उतरेंगे?

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