कांग्रेस नेताओं को बोलने से पहले अपने इतिहास अपनी संस्कृति संस्कारों के बारे में पूरी जानकारी ले लेनी चाहिए़
वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘न्यूज़ऑनराडार.कॉम’ के हिमाचल स्थित ब्यूरो प्रमुख स्वर्णदीपक रैना, देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को अपने पुराने हथकंडे छोड़ने का परामर्श देते हुए* !
चम्बा (हि. प्र.): सभी मुद्दे अब तक फेल हो चुके हैं। क्योंकि लोकसभा, राज्यसभा में एक से बड़ एक धुरंधर सांसद हैं। सबसे बड़ी बात है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वा अमित शाह जैसे नेता भी हैं।
लीडर ऑफ ऑपोजिशन राहुल गांधी जो बोलते हैं फिर पीछे मुड़ कर देखते हैं जिस प
र कांग्रेस सांसदों को वाह वाह करनी ही पड़ती है।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह भी बहुत बोलते हैं। सब लोग बोलते लोकसभा- राज्यसभा में ही हैं। बाहर बोलते हैं तो मानहानि के केस दर्ज हो जाते हैं।
आम आदमी पार्टी मुखिया अरविन्द केजरीवाल की बारी लग चुकी है। बाकियों की भी लगने वाली है। पी एम मोदी किसी को माफ करने वाले नहीं हैं ? वो इन सब को अत्यंत ध्यान से सुनते हैं। किसी का तुरंत उत्तर नहीं देते हैं। विपक्ष पूरी तरह से लड़खड़ा रहा है।
अभी कांग्रेस के नेता पेपर लीक के केस में इतनी बुरी तरह से फंस चुके हैं अपनी ही सरकारों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप प्रत्यारोप तो चलते रहते हैं जब तक आपके पास कोई ठोस सबूत नहीं होता आप या आपकी पार्टी साफ सुथरी है। फिर भी उस मुद्दे पर बार
बार विचार करने के बाद ही आगे बढ़ना चहिये ? वर्ना सदन में तो निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर जैसे वा अन्य एक से बड़ कर एक धुरंधर बैठे हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद हों या अखिलेश यादव की पार्टी के नेता सब धीरे धीरे चपेट में आ चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी कुछ अधिक ही बोलने लगे हैं जो घाटिक हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी में कितनी सहनशीलता है वो शेर की तरह दो कदम पीछे हट कर जो वार करते हैं उसकी कल्पना भी विपक्षी नेताओं ने सपने में भी नहीं की होती।
यही कारण है नरेंद्र मोदी एकदम किसी बात पर रिएक्शन नहीं देते हैं। वो छोड़ते भी किसी को नहीं हैं।
13 साल गुजरात के मुख्य मंत्री रहने के बाद अब 2014 से प्रधानमंत्री हैं। करीब 25 साल से राजनीति के उच्च शिखर पर हैं । सारा कार्य करने के बाद देश के नागरिकों से भी सीधी बात कर लेते हैं। विदेशों में भी भारत का नाम चल रहा है। जो गत दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की बात कर रहे थे , लोगों को बेहोश होते दिखा रहे थे। अब उनकी भी बारी आयेगी। क्योंकि इंडेन ने घोषणा कर दी है गैस सिलेंडर बुक करवाने के बाद 4 घंटों में सप्लाई दे दी जायेगी।
हिमाचल की सुखविंदर सिंह सुखु सरकार गरीबों का शोषण कर रही है। सरकारी डिपुओं पर भारत सरकार द्वारा जारी आटा ,
चावल वा चीनी ही मिल रही है। चंबा में गत चार पांच महीनों से कोई तेल नहीं मिल रहा है। लेकिन सरकार ने पांच फॉरच्यूनर खरीदने के आदेश दे दिये हैं। हिमाचल में 30 मित्रों से अधिक की फौज है। जिनको औसतन डेढ़ लाख महीना अन्य सुविधाएं अलग मिलती हैं। पांच साल का अर्थ है , 60 महीनों में 90 लाख वेतन ? कांग्रेसी नेताओं को कोई डर नहीं लगता है ? जनता जो चाहे कर ले। जनता कर भी क्या सकती है ?
फिर भी मुख्यमंत्री धड़ले से लिखने वालों पर पुलिस में FIR दर्ज करवाते हैं ? उन्होंने पत्रकारों को यूट्यूब वालों चैनल वालों को सबक सिखा दिया है।
वहीं IAS हों या आईपीएस हों , IFS हों सबको नौकरी करना सिखा दी है। जो करना है मुख्यमंत्री कर देते हैं। अब पति-पत्नी को हर महीने वेतन ही सात लाख मिलता है बताओ ? कोई अदालत अब तक उनका कुछ भी नहीं कर सकी ? बीजेपी वालों को इनसे सबक सीखना चाहिए। वो सरेआम कहते हैं हर मंच से कहते हैं अगली सरकार फिर हिमाचल में कांग्रेस की ही बनेगी। कांग्रेस में जो अभी पप्पू हैं अगली बार एक भी नजर नहीं आयेगा?
हम को अधिक पता नहीं मुख्यमंत्री जी ने ही किसी जगह पत्रकारों को बताया हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पांच गुटों में बंटी है ? *(लेख में प्रकट विचार लेखक के निजी हैं)