'अब बेटी पाकिस्तान नहीं जाएगी': पिता की भावुक पुकार
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अब बेटी पाकिस्तान नहीं जाएगी’: पिता की पुकार

ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी के बाद पिता ने राष्ट्रपति को लिखा भावुक पत्र, न्याय की मांग…..

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हरियाणा के हिसार में रहने वाले यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 16 मई को सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद से ही ज्योति की मां, बहन और पिता लगातार सदमे में हैं। अब ज्योति के पिता ने राष्ट्रपति को एक भावुक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की है और साफ शब्दों में कहा है कि अब उनकी बेटी कभी पाकिस्तान नहीं जाएगी।

ज्योति मल्होत्रा पर गंभीर आरोप है कि वह पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रही थी। पुलिस का दावा है कि उसके पास से संदिग्ध डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन आरोपों के बाद से सोशल मीडिया और आम जनता में काफी चर्चा है, लेकिन ज्योति के परिवार का कहना है कि वह निर्दोष है और उसे फंसाया गया है।

पिता ने पत्र में लिखा कि उनकी बेटी एक सामान्य यूट्यूबर है जो समाजिक मुद्दों और भारत-पाक संबंधों पर वीडियो बनाती रही है। उनका कहना है कि ज्योति कभी किसी देश के खिलाफ नहीं बोलती थी, बल्कि हमेशा अमन और शांति की बात करती थी। उन्होंने कहा कि मीडिया और कुछ तत्वों ने बिना सच्चाई जाने उसे देशद्रोही घोषित कर दिया और उनकी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी।

उन्होंने राष्ट्रपति से अपील की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और अगर उनकी बेटी दोषी नहीं पाई जाती तो उसके नाम को बहाल किया जाए। उनका कहना है कि एक बाप के लिए यह सबसे बड़ा दर्द होता है जब उसकी संतान को बिना कसूर के अपराधी बना दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे कभी भी अपनी बेटी को पाकिस्तान जाने की इजाजत नहीं देंगे, भले ही वह शांति का संदेश लेकर ही क्यों न जाए।

ज्योति का यूट्यूब चैनल अब बंद कर दिया गया है और उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, उसके समर्थक सोशल मीडिया पर “जस्टिस फॉर ज्योति” नाम से मुहिम चला रहे हैं और इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

गिरफ्तारी के बाद से ज्योति न्यायिक हिरासत में है और अगली सुनवाई कुछ दिनों में होनी है। परिवार को अब राष्ट्रपति से उम्मीद है कि वे इस पत्र पर संज्ञान लेंगे और किसी निर्दोष को गलत सज़ा नहीं मिलने देंगे। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि डिजिटल युग में जहां आवाजें जल्दी बुलंद होती हैं, वहां न्याय भी उतनी ही तेजी से मिलना चाहिए।

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