पीएम मोदी का जापान दौरा: क्वाड से बुलेट ट्रेन और AI तक, भारत के लिए क्या होगा अहम?
दो दिवसीय यात्रा में सुरक्षा, व्यापार और तकनीक पर बड़े करार की उम्मीद.....
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय जापान दौरे (28-29 अगस्त 2025) पर हैं। इस दौरान वे भारत-जापान के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा से मुलाकात करेंगे। अमेरिका द्वारा भारत पर 50% तक आयात शुल्क लगाने के बाद यह यात्रा और भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नए आयाम देने की तैयारी कर रहे हैं।
करीब सात साल बाद भारत-जापान सम्मेलन में शामिल हो रहे पीएम मोदी जापान से लौटने के बाद चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे।
भारत-जापान रिश्तों की अहमियत
भारत और जापान के रिश्ते सदियों पुराने हैं। 752 ईस्वी में भारतीय साधु बोधिसेना द्वारा नारा के तोदाईजी मंदिर में भगवान बुद्ध की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों की नींव माना जाता है। आधुनिक दौर में स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और जस्टिस राधा बिनोद पाल जैसी शख्सियतों ने इन रिश्तों को गहराई दी। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत और जापान ने शांति संधि पर हस्ताक्षर कर औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए।
दौरे के मुख्य मुद्दे
क्वाड गठबंधन: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग बढ़ाने के लिए क्वाड प्रमुख एजेंडा रहेगा। इसमें स्वास्थ्य सुरक्षा, उभरती तकनीकें और आपूर्ति श्रृंखला पर सहयोग अहम होगा।
रक्षा समझौते: भारत और जापान रक्षा उत्पादन में साझेदारी बढ़ा सकते हैं। ‘UNICORN प्रोजेक्ट’ जैसे सहयोगी कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुके हैं। फाइटर जेट इंजन तकनीक पर साझा विकास की दिशा में भी बातचीत हो सकती है।
व्यापार और निवेश: जापान ने भारत में अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन (करीब 5.95 लाख करोड़ रुपये) के निवेश का वादा किया है। दोनों देश सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में साझेदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बुलेट ट्रेन: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए जापान की ई10 बुलेट ट्रेन पर चर्चा होगी। यह ट्रेन 320 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेगी और इसमें भूकंप-रोधी तकनीक भी शामिल होगी।
निष्कर्ष
पीएम मोदी का यह दौरा न सिर्फ अमेरिका के टैरिफ फैसले से उपजे दबाव को संतुलित करने का प्रयास है, बल्कि भारत-जापान संबंधों को रणनीतिक और आर्थिक स्तर पर नए मुकाम तक ले जाने का अवसर भी है।
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