पीजीआईएमईआर में की गई ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर की तीन जटिल सर्जरी, आठ घंटे में - News On Radar India

पीजीआईएमईआर में की गई ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर की तीन जटिल सर्जरी, आठ घंटे में

प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार और उनकी टीम ने एक ही ऑपरेशन थिएटर में कीं तीन रैडिकल सिस्टेक्टॉमी, पेल्विक लिम्फ नोड डिसेक्शन और यूरिनरी डायवर्जन की प्रक्रियाएँ

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चंडीगढ़: पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के यूरोलॉजी विभाग की यूनिट-II ने एक उल्लेखनीय सर्जिकल उपलब्धि हासिल करते हुए महज आठ घंटे में ब्लैडर (मूत्राशय) कैंसर के तीन मरीजों की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की। विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार के नेतृत्व में उनकी टीम ने सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक एक ही ऑपरेशन थिएटर में तीन रैडिकल सिस्टेक्टॉमी कीं। इन सभी सर्जरी में पेल्विक लिम्फ नोड डिसेक्शन और यूरिनरी डायवर्जन की प्रक्रियाएँ भी शामिल थीं।

प्रो. संतोष कुमार के अनुसार, तीनों मरीजों को ऑपरेशन के दौरान रक्त चढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी और सभी को अच्छी  स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सटीक सर्जिकल तकनीक, रक्तस्राव पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अपनाई गई विशेष ‘संतोष पीजीआई तकनीक’, ऑपरेशन से पहले और बाद की बेहतर तैयारी तथा पूरी टीम के समन्वित प्रयासों को दिया।

डॉ. कुमार ने इसे संभावित वैश्विक प्रथम उपलब्धि और विश्व रिकॉर्ड बताया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड में दुनिया के अन्य संस्थानों में ऐसी उपलब्धि के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं है।

रैडिकल सिस्टेक्टॉमी यूरोलॉजी की सबसे जटिल सर्जरी में से एक है। यह आमतौर पर उन मरीजों में की जाती है, जिनका ब्लैडर कैंसर मूत्राशय की मांसपेशियों तक पहुंच चुका हो या बीमारी गंभीर अवस्था में हो। इस ऑपरेशन में कैंसर से प्रभावित मूत्राशय को निकालने के साथ आसपास की लिम्फ नोड्स भी हटाई जाती हैं, ताकि कैंसर के फैलाव का पता लगाया जा सके। इसके बाद शरीर से पेशाब बाहर निकालने के लिए नया रास्ता बनाया जाता है। इसके लिए आमतौर पर आंत के एक हिस्से का इस्तेमाल किया जाता है।

इस तरह की जटिल सर्जरी में सर्जन की विशेषज्ञता के साथ एनेस्थीसिया टीम, ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों और ऑपरेशन के बाद मरीज की देखभाल करने वाली टीम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

पीजीआईएमईआर जैसे बड़े सार्वजनिक चिकित्सा संस्थान में मरीजों की भारी संख्या के बीच इस प्रकार की तीन सर्जरी निर्धारित समय में पूरी करना बेहतर योजना, उपलब्ध संसाधनों के कुशल इस्तेमाल और टीमवर्क को दर्शाता है।

प्रो. संतोष कुमार ने इस उपलब्धि में योगदान के लिए पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल,  पंकज राय, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. अशोक कुमार, एनेस्थीसिया टीम के डॉ. श्याम चरण, एमसीएच यूरोलॉजी के रेजिडेंट डॉक्टरों, ऑपरेशन थिएटर की नर्सिंग टीम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग की सराहना की।

यह उपलब्धि प्रो. कुमार की पूर्व सर्जिकल उपलब्धियों की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है। जनवरी 2026 में उनके नेतृत्व में टीम ने एक ही दिन में एक दा विंची रोबोटिक सिस्टम की मदद से प्रोस्टेट कैंसर की चार रोबोट-असिस्टेड सर्जरी की थीं। इसके अलावा, एम्स बठिंडा में उनके नेतृत्व वाली टीम ने लगभग नौ घंटे में लगातार तीन जीवित किडनी दाताओं के प्रत्यारोपण भी किए थे।

पीजीआईएमईआर की यह उपलब्धि जटिल कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में संस्थान की विशेषज्ञता, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और सामूहिक प्रयासों की क्षमता को रेखांकित करती है।  (रोशन लाल शर्मा की रिपोर्ट)

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