पीजीआईएमईआर में 8वीं सालाना न्यूटिशन राष्ट्रीय पोषण माह काआयोजन किया गया
चंडीगढ़: पीजीआईएमईआर (PGIMER), चंडीगढ़ के डाइटेटिक्स विभाग ने ‘न्यूट्रिशन सोसायटी आफ इंडिया’ (NSI), चंडीगढ़ चैप्टर के सहयोग से राष्ट्रीय पोषण माह (जो हर साल सितंबर के महीने में मनाया जाता है) के अवसर पर “माइक्रोबायोम से मेटाबॉलिज्म तक: माइक्रोबायोम-लक्षित पोषण के सकल प्रभाव” (From Microbiome to Metabolism: Clinical Impacts of Microbiome Targeted Nutrition) विषय पर अपनी 8वीं सालाना राष्ट्रीय पोषण कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। मुख्य खुराक माहिर (डाईटीशियन) डॉ. नैंसी साहनी इस कॉन्फ्रेंस की आयोजन सचिव (ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी) थीं।
इस कॉन्फ्रेंस का एक और मुख्य आकर्षण रीनल (किडनी) के मरीजों के लिए ‘प्लाडो’ (PLADO – Plant Based
Low Protein Diet) पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण था। पीजीआईएमईआर की मुख्य डाईटीशियन डॉ. नैंसी साहनी द्वारा लिखी गई यह पुस्तक ‘प्लांट-डोमिनेंट लो-प्रोटीन डाइट’ (PLADO) को पेश करती है, जो कि एक नवीन और सबूत-आधारित खुराक मॉडल है। यह पारंपरिक प्रतिबंधात्मक तरीकों से हटकर अधिक संपूर्ण (होलिस्टिक) और पैथोफिज़ियोलॉजी-संचालित ढांचे की तरफ तब्दीली का प्रतीक है। पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के माननीय डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने, डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन और मुख्य मेडिकल सुपरडेंडेंट और अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रो. अशोक कुमार (सम्मानित मेहमान के तौर पर) के साथ मिलकर इस प्रोग्राम का उद्घाटन किया और पुस्तक का लोकार्पण भी किया।
इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य इस क्षेत्र में नवीनतम तरक्की पर चर्चा करने के लिए डाईटीशियनो, डॉक्टरों और खोजकर्ताओं को एक मंच पर लाना था। वैज्ञानिक प्रोग्राम में प्रीबायोटिक्स की भूमिका (जो कि प्याज, लहसुन, चिकोरी रूट पाउडर, केले, बकरी और बोवाइन दूध और कई फलों और सब्जियों के फाइबर जैसे खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं) पर सेशन शामिल थे। इसके तहत आंतों के फायदेमंद बैक्टीरिया को चयनात्मक तरीके से उत्तेजित करने, शॉर्ट-चेन फैटी एसिड के उत्पादन को बढ़ाने, आंतों की कार्यप्रणाली को मजबूत करने और आंत-जिगर-दिमाग धुरी (गट-लिवर-ब्रेन एक्सिस) को नियमित करने के साथ-साथ आंतों से बाहर की सेहत को प्रोत्साहित करने (जैसे कि शुगर के मरीजों में ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करना, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर का इलाज करना और हड्डियों की खनिज सोखने की क्षमता में सुधार करके हड्डियों की घनत्व का समर्थन करना) की उनकी क्षमता पर चर्चा की गई।
कॉन्फ्रेंस का एक और मुख्य आकर्षण रीनल (किडनी) के मरीजों के लिए PLADO पुस्तक का लोकार्पण था। डॉ. नैंसी साहनी द्वारा लिखी गई यह पुस्तक PLADO मॉडल को पेश करती है, जो कि पारंपरिक प्रतिबंधात्मक तरीकों से हटकर एक संपूर्ण दृष्टिकोण अपनाती है। किडनी के अनुकूल खुराक की तरफ बढ़ना अक्सर मुश्किल लगता है, जिससे कई पाबंदियां और खुराक की थकान (डाइट फटीग) पैदा होती है। PLADO पुस्तक किडनी-अनुकूल खुराक अपनाने की इस जटिल प्रक्रिया को आसान बनाती है। यह शाकाहारी, वीगन और चयनात्मक मांसाहारी खाद्य पदार्थों के कई विकल्प प्रदान करती है, जिन्हें प्रोटीन, पोटाशयम, फास्फोरस और कुल ऊर्जा संतुलन जैसे मुख्य पोषण संबंधी मापदंडों पर ध्यान देते हुए सोच-समझकर तैयार किया गया है, जो कि सीकेडी (CKD) से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त हैं। उपचार संबंधी मूल्य के अलावा, ये पकवान स्वाद, बनावट (टेक्सचर) और देखने में आकर्षक होने पर जोर देते हैं, जिससे खुराक प्रबंधन में लंबे समय तक इसकी पालना करने की सबसे बड़ी चुनौती का हल होता है।
कॉन्फ्रेंस में देश भर से डाईटीशियनो, डॉक्टरों और विद्यार्थियों समेत लगभग 250 लोगों ने उत्साह से भाग लिया। (हरमिंदर नागपाल की रिपोर्ट)