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ए.आई (AI) के इस्तेमाल से भारत के चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारीं परिवर्तन होंगे: डॉ पुरोहित

डॉ. नरेश पुरोहित* सामुदायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, हमारे नियमित लेखक हैं, आज चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के बारे में बता रहे हैं

पटियाला / नई दिल्ली : पटियाला स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन यूनिट की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन मेडिसिन एंड हेल्थकेयर (एआई) विषय पर सोमवार को सतत् चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम ( सीएमई) आयोजित किया गया ।AI.2
कार्यक्रम मे अपने उद्‌बोधन के पश्चात बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साईंसेस के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के विजिटिंग प्रोफेसर डाॅ नरेश पुरोहित ने मीडिया संवादाताओ को बताया कि आगामी पांच साल में ए.आई. के इस्तेमाल से भारत के चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारीं परिवर्तन होंगे।

महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ पुरोहित ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके क्लीनकल डिसीजन मेकिंग की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जायेगा।इससे डाटा एनालिसिस और चिकित्सा विज्ञान में बहुत फायदा होने वाला है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ह्यूमन ब्रेन को रिप्लेस कभी नहीं कर सकता, लेकिन यह शोध , उपचार व दैनिक जीवन के काम करने में काफी मददगार साबित होगा।

उन्होंने बताया कि आने वाला समय एआई का है। ऐसे में रोगियों के बेहतर उपचार हेतु बेहतर तकनीक चाहिए। एआई के जरिये जितना अच्छा डाटा सिस्टम में होगा, उतना ही बेहतर इलाज होगा।

उन्होने कहा कि एआई के जरिए मेडिसिन, सर्जरी, डाटा एनालिसिस आदि में बहुत मदद मिलेगी। प्रसिद्ध चिAI in brainकित्साविद्‌ ने चेताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समक्ष चुनौतियां भी बहुत है। इसके लिए इलाज करने वाले डॉक्टर को यह समझना होगा कि एआई रिकमेंडेशन या कमांड दे रहा है तो उसके पीछे क्या कारण है। उनको समझ कर निर्णय लेना होगा। जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

विशेषज्ञो ने कार्यक्रम मे जानकारी देते हुए बताया कि एआई मरीज की बीमारी के बारे में अलार्म व सिंगल देने में मददगार होगा। एआई की मदद से जीवन शैली रोगो से बचने के तरीके, समय पर मरीज को सजेस्ट किए जा सकते है। एआई आने वाले समय में हमारे लिए हेल्पिंग टूल बनने वाला है।


Dr. Naresh Purohit*Dr. Naresh Purohit-MD, DNB, DIH, MHA, MRCP(UK), is an Epidemiologist, and Advisor-National Communicable Disease Control Program of Govt. of India, Madhya Pradesh and several state organizations) .

Dr.  Purohit is also Principal Investigator for the Association of Studies For Kidney Care.

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