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इंफेक्‍शन: फफूंदी से बीमार पड़ सकता है आपका बच्‍चा

इंफेक्‍शन अटैक: कुछ घरों क बनावट या संरचना ही ऐसी होती है कि उनकी दीवारों में फफूंदी लग जाती है। ये फफूंदी बच्‍चों के लिए हानिकारक हो सकती है। फफूंदी खुद टॉक्सिक नहीं होती है लेकिन इसके कुछ प्रकार टॉक्सिंस बना सकते हैं। अगर इन टॉक्सिंस को खा लिया जाए, छुआ जाए या इसमें सांस ली जाए तो इससे सेहत को हानिकारक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं।

लंबे समय तक किसी चीज के गीले रहने पर, उसके ऊपर फफूंदी बननी शुरू हो सकती है। उमस वाली हवा और वॉटर डैमेज से ज्‍यादा गीलेपन और मॉइश्‍चर की वजह से फफूंदी बननी शुरू होती है। अगर आपके घर में भी बेबी है तो आपको यह जानकारी जरूर होनी चाहिए फफूंदी को आपको अपने घर और बच्‍चे से क्‍यों दूर रखना है।

फफूंदी कुछ बच्‍चों को दूसरों से ज्‍यादा प्रभावित कर सकती है। हर तरह की फफूंदी से श्‍वसन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं जैसे कि खांसने और घरघराहट होने और श्‍वसन मार्ग में इंफेक्‍शन होने की। अगर आपके बच्‍चे को पहले से ही अस्‍थमा है, तो फफूंदी वाली हवा में सांस लेना उसके लिए खतरनाक हो सकता है और उसे अस्‍थमा अटैक भी आ सकता है।

फफूंदी एलर्जिक रिएक्‍शन और एलर्जिक राइनाइटिस भी कर सकती है। अगर आपके बच्‍चे को फफूंदी से एलर्जी है तो बच्‍चे को इसके संपर्क में आने पर छींक, गले या मुंह में जलन, नाक बहने या बंद होने, आंखों से पानी आने, खुजली होने या लालिमा की शिकायत हो सकती है।

फफूंदी का असर बच्‍चे के इम्‍यून सिस्‍टम पर भी पड़ सकता है। अगर आपके बच्‍चे का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर है तो उसे फफूंदी के आसपास होने पर सांस लेने में दिक्‍कत होने का खतरा ज्‍यादा रहता है।

अगर आपके एसी में फफूंदी बन रही है तो इससे एक दुर्लभ समस्‍या हाइपरसेंसिटिविटी निमोनिटिस का खतरा बढ़ सकता है। इसके लक्षण निमोनिया की तरह ही होते हैं लेकिन इसे एंटीबायोटिकों से ठीक किया जा सकता है। यह समस्‍या बच्‍चों से ज्‍यादा वयस्‍कों में होती है। इसके लक्षणों में सांस लेने में दिक्‍कत, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, थकान, बुखार, रात को पसीना आना शामिल है।

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