बच्चों की सकारात्मक परवरिश

अच्छे अभिभावक वे होते हैं जो अपने बच्चे की मनःस्थिति को समझते हुए उसे निखारते है, उसे अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन देने के लिए प्रेरित करते हैं। माता-पिता होने के नाते सिर्फ बच्चे की जरूरतों को पूरा करना ही काफी नहीं है, आपको उसे जिंदगी में संतुलन की अहमियत को भी समझाना चाहिए।

1. बच्चे की ताकत को खोजें

बच्चे में स्वाभिमान जगाने से लकर उसके आत्म-सम्मान को बढ़ाने तक के लिए जरूरी है कि आप बच्चे की ताकत, उसकी प्रतिभा को खोजें। इससे आपको बच्चे से जुड़ी कई मुश्किलों का हल मिल जाएगा। बच्चे आपकी बात को तब सुनना पसंद करते है, जब हम उन्हें बिना बेइज्जत किए या डराए हुए सुनते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे की ताकत को पहचानें और उससे जोड़कर बच्चे को उसकी किसी भी स्थिति या व्यवहार में बदलाव लाने को कहें।

2. उसे शाबाशी या इनाम दें, सजा नहीं

यह सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, बल्कि बड़ों पर भी लागू होता है । किसी काम के लिए शाबाशी या आपके द्वारा उस काम को स्वीकार किया जाना भी बच्चे में प्रोत्साहन को बढ़ा देता है। जब भी बच्चों को उनकी प्रतिभा के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, वहीं आपको उनकी कमियों को देखने के लिए एक मौका भी मिल जाता है, जिससे आप उनकी कमियों पर भी सकारात्मक रूप से काम कर सकते हैं।

3. गुस्से, तंज या बेहूदा मजाक पर न दें भावनात्मक प्रतिक्रिया

अगर बच्चों को गुस्सा आ रहा हो या वे कोई बेतुकी बात कर दें, तब भी आप उस पर अपनी कठोर प्रतिक्रिया न दें। यह बच्चों को अनुशासन में रखने की प्रचलित पेरेटिंग टिप्स में से एक है। इससे बच्चों को खुद पर काबू रखने और आपकी बात पर ध्यान देने में मदद मिलेगी, ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।

4. दो बच्चों में न करें तुलना

उम्मीद है कि आप कभी नहीं चाहेंगे कि आपके परिवार में दो बच्चों के बीच दुश्मनी हो जाए। इसके लिए आप यह जरूर सुनिश्चित कीजिए कि दोनों बच्चों को बिना भेद-भाव या किसी एक को अलग-थलग किए, बराबर प्यार और देखभाल मिले।

5. लगातार चाहिए सहयोग

आज के दौर में बच्चों की हर चीज उनके हर भाव को समझ पाना आसान नहीं है और हो सकता है कि आप भी किसी ऐसी ही स्थिति से जूझ रहे हों। ऐसे में आप चाहें तो किसी विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं। इससे आप सही समय पर अपने बच्चे को उसकी स्थिति को संभालने में सहयोग भी कर पाएंगे।

6. सकारात्मक ध्यान दें

बच्चा हमेशा ही बातचीत करना चाहता है, इसीलिए जब भी आप उससे बात करें तो वह सकारात्मक होनी चाहिए, जिसमें प्यार और देख-रेख दोनों शामिल हों। ऐसा न हो कि आप सिर्फ उससे बात करने के लिए बात कर रहे हों। उसे सकारात्मक रवैये के साथ अपना समय दें।

7. इंटरनेट के इस्तेमाल पर रहे आपकी नजर

इंटरनेट बहुत बड़ा और खतरनाक भी है, इसलिए जब भी बच्चा इंटरनेट का इस्तेमाल करे तो आप उस पर कड़ी निगरानी बनाए रखें। इंटरनेट के इस्तेमाल के दौरान भले बच्चा वेबसाइट्स को सर्च करे, मोबाइल फोन में किसी एप्लीकेशन को डाउनलोड करे, चैट करे या फिर कोई वीडियो आदि देखें, लेकिन आप जिम्मेदारी से न चुके।

8. संतुलन बनाएं

जब बात बच्चे की जरूरत की आती है तो हमें अपनी पूरी जिंदगी भी कम लगती है। लेकिन बाद में इसका नतीजा यह होता है कि अपनी जिंदगी न जी पाने का गुस्सा हम बच्चे पर निकालते हैं। जरूरी है कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि बच्चे को उसके हिस्से की खुशियां देते समय हम अपने लिए भी कुछ समय बचाते हुए चलें। इसे ही जिंदगी में संतुलन कहा जाता है।

9. बच्चे के लिए बनें रोल मॉडल

अच्छे माता-पिता बनने की पेरेंटिंग टिप्स में सबसे अहम बात मानी जाती है अपने बच्चे के लिए रोल मॉडल या उनके लिए मिसाल बनना। चूंकि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार का ही अनुसरण करते हैं, इसीलिए आपको कभी भी ऐसी प्रतिक्रियाएं नहीं देनी चाहिए जिसकी अपेक्षा आप खुद बच्चे से नहीं करते हों।

10. कभी हार न मानें

आप एक बच्चे के माता-पिता हैं और यह भी अपने आप में बहुत है। अपने बच्चे को लेकर आपका विश्वास और उम्मीदों का साथ कभी नहीं छोड़ें। अपने बच्चे को सही परवरिश देने के लिए, कैसी भी स्थिति या संकट का सामना करना पड़े, आप अपनी हिम्मत न हारें।

आप अपनी परवरिश पर पूरा भरोसा रखें, क्योंकि माता-पिता बनना सौभाग्य है, जो आपको मिला है। सिर्फ परवरिश के कुछ गुर सीखने के साथ ही आप अपने बच्चे और अपनी जिंदगी में अहम बदलाव ला सकते हैं।

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