हेमा मालिनी ने क्यों माना शोले का छोटा रोल - News On Radar India

हेमा मालिनी ने क्यों माना शोले का छोटा रोल

‘जब तक है जान’ की गर्मी में हुई शूटिंग की यादें…..

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‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं, लेकिन ‘शोले’ की बसंती आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई है। इस फिल्म के 50 साल पूरे होने पर हेमा मालिनी ने ‘भास्कर’ से बातचीत में खुलासा किया कि उन्होंने शुरू में ‘शोले’ में छोटा रोल करने के लिए भी हामी भर दी थी, क्योंकि उन्हें निर्देशक रमेश सिप्पी पर पूरा भरोसा था और उन्हें पता था कि इस फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए खास साबित होगा।

हेमा मालिनी ने बताया कि उस समय वह पहले से ही रमेश सिप्पी के साथ काम कर चुकी थीं और उनकी फिल्ममेकिंग की शैली और नजरिए को अच्छी तरह जानती थीं। उन्होंने कहा कि जब ‘शोले’ की स्क्रिप्ट उनके पास आई, तो बसंती का किरदार उन्हें बेहद दिलचस्प लगा। भले ही स्क्रीन पर उनका समय अन्य किरदारों की तुलना में कम था, लेकिन वह इतने रंग और ऊर्जा से भरपूर था कि उन्होंने बिना सोचे-समझे इसे स्वीकार कर लिया।

उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए कहा कि ‘जब तक है जान’ गाने की शूटिंग तपती गर्मी में हुई थी। उस दौरान लोकेशन पर तेज धूप और गर्म हवाएं चल रही थीं, लेकिन पूरी टीम ने बिना शिकायत किए मेहनत जारी रखी। हेमा मालिनी ने मुस्कुराते हुए कहा कि घोड़ी पर बैठकर, लगातार डायलॉग बोलते हुए और गाना फिल्माते समय उन्हें पसीना पोंछने का भी वक्त नहीं मिलता था, लेकिन दर्शकों की तालियों ने उस मेहनत को सार्थक बना दिया।

बसंती का किरदार निभाने के बारे में हेमा ने कहा कि इसमें चुलबुलापन, मासूमियत और हिम्मत—तीनों का मेल था। वह किरदार आज भी उतना ही लोकप्रिय है और बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उसे याद करते हैं। उन्होंने माना कि यह किरदार उनके करियर के सबसे अहम मील के पत्थरों में से एक है।

हेमा मालिनी ने रमेश सिप्पी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हर कलाकार के किरदार को बराबर अहमियत दी, चाहे वह स्क्रीन पर कितनी देर क्यों न हो। यही वजह है कि ‘शोले’ का हर चरित्र, चाहे वह गब्बर सिंह हो, वीरू, जय, बसंती या यहां तक कि जेलर—सब लोगों की यादों में हमेशा के लिए बस गए।

उन्होंने कहा कि आज जब वह ‘शोले’ को देखती हैं, तो गर्व होता है कि वह इस ऐतिहासिक फिल्म का हिस्सा थीं। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि किसी भी काम की अहमियत उसके आकार से नहीं, बल्कि उसमें डाले गए जुनून और ईमानदारी से तय होती है।

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