विदुषी सुमित्रा गुहा का शास्त्रीय जादू | भारतीय संगीत की अद्भुत प्रस्तुति

विदुषी सुमित्रा गुहा का शास्त्रीय जादू बिखरा

राग बैरागी भैरव से शुरू हुई संगीत सभा, छात्रों ने भावविभोर होकर सुनी सुरों की साधना…..

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जयपुर में आयोजित एक विशेष संगीत सभा में जब प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका विदुषी सुमित्रा गुहा ने अपने सुरों की महफिल सजाई, तो उपस्थित सभी श्रोता संगीत के इस अद्भुत संसार में खो गए। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में संगीत के छात्र शामिल हुए, जिनके बीच विदुषी गुहा का सान्निध्य और गायन एक प्रेरणादायक अनुभव बन गया।

संगीत सभा की शुरुआत राग बैरागी भैरव से हुई, जिसे विदुषी गुहा ने अपनी विशिष्ट शैली और पूर्ण भावप्रवणता के साथ प्रस्तुत किया। जैसे ही उन्होंने आलाप की शुरुआत की, वातावरण एक आध्यात्मिक आभा से भर गया। श्रोताओं ने आंखें मूंदकर सुरों की लहरों में स्वयं को डुबो दिया। यह अनुभव केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं था, बल्कि एक साधना थी, एक संवाद था आत्मा से आत्मा तक।

विदुषी गुहा ने न सिर्फ शुद्ध रागों की प्रस्तुति दी, बल्कि हर बंदिश और ताल में ऐसी सजीवता भरी कि वह सीधे दिल को छू गई। उनके सुरों में एक गहराई थी, जो श्रोताओं को एक अलग ही दुनिया में ले जाती थी। चाहे वह राग की लयबद्धता हो या शब्दों की आत्मा, सब कुछ इतने सौंदर्य से गूंज रहा था कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

कार्यक्रम में छात्रों के बीच बातचीत करते हुए विदुषी सुमित्रा गुहा ने संगीत की साधना और उसके महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि “शास्त्रीय संगीत केवल रियाज़ का नहीं, बल्कि समर्पण और अनुशासन का नाम है। जब आप रागों से संवाद करते हैं, तो वह आपको जीवन के हर भाव से जोड़ देता है।”

संगीत सभा का समापन राग भैरवी में एक मधुर ठुमरी के साथ हुआ, जिसने समस्त वातावरण को और भी मधुरता से भर दिया। छात्र, गुरुजन और संगीत प्रेमी सभी इस संगीत यात्रा का हिस्सा बनकर अभिभूत हो उठे।

इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि शास्त्रीय संगीत आज भी उतना ही जीवंत, प्रभावशाली और आत्मा को छूने वाला है जितना कि पहले था। विदुषी सुमित्रा गुहा जैसे कलाकार इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके संगीत में जो सरलता, गहराई और भावना है, वह उन्हें श्रोताओं से आत्मिक रूप से जोड़ देती है।

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