राष्ट्रीय ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ की तैयारी पूरी; ‘लैब टू लैंड’ से खेत तक पहुँचेगी रिसर्च : कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान - News On Radar India
News around you

राष्ट्रीय ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ की तैयारी पूरी; ‘लैब टू लैंड’ से खेत तक पहुँचेगी रिसर्च : कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

देश में खाद्य सुरक्षा, गेहूं–धान का भंडार, दाल–तिलहन में आत्मनिर्भरता की मुहिम और किसानों की आय में वृद्धि मुख्य लक्ष्य: किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री 

2

भोपाल/ नई दिल्ली:  मध्य प्रदेश के रायसेन में कल से शुरू हो रहे‘ राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव’ से पहले केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में प्रैस को संबोधित किया। उन्होंने कहा  देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत के हर नागरिक तक पोषणयुक्त आहार पहुँचाना और खेती पर निर्भर 46% आबादी की आय लगातार बढ़ाना केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इसी विज़न को ज़मीन पर उतारने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले राष्ट्रीय स्तर केउन्नत कृषि महोत्सव’ को खेती की सूरत बदलने वाला बड़ा कदम बताया है।

केंद्रीय  ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल में  कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार का मूल उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और जनता को संतुलित पोषण देना है। उन्होंने कहा कि भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी में से लगभग 46% जनसंख्या आज भी सीधे खेती पर निर्भर है, इसलिए किसानों की आजीविका सुरक्षित रखना और उनकी आय बढ़ाना सरकार का केन्द्रीय सरोकार है।

केंद्रीय  मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि अब लक्ष्य केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि अनाज के साथ फल, सब्जियाँ, दूध, श्री अन्न और दालों की पर्याप्त उपलब्धता कराकर ठीक पोषण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार एक साथ उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक पद्धतियों के विस्तार पर काम कर रही है।

गेहूं–धान में पर्याप्त भंडार, दाल–तिलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री  चौहान ने कहा कि गेहूं और धान के मामले में हमारे भंडार भरे हुए हैं, लेकिन दलहन और तिलहन में आज भी भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन–तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके।

छोटी जोत की चुनौती, समाधान के रूप में इंटीग्रेटेड फार्मिंग:  चौहान ने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत लगभग 0.96 हेक्टेयर रह गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों में 10–15 हज़ार हेक्टेयर तक के फार्म हाउस हैं। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी जोत में खेती को लाभकारी बनाना और आय बढ़ाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने याद दिलाया कि सहकारी खेती का प्रयोग पहले हुआ, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली, ऐसे में अब मंत्रालय का फोकस इंटीग्रेटेड फार्मिंग (समेकित कृषि प्रणाली) पर है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने बताया कि सरकार ने एक हेक्टेयर के मॉडल तैयार किए हैं, जिनमें किसान एक ही जमीन पर अनाज, फल, सब्जियाँ, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी जैसी एक से अधिक गतिविधियाँ एक साथ कर सकेगा। उन्होंने कहा कि केवल अनाज पैदा करने से आय सीमित रहेगी, इसलिए कई गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आमदनी बढ़ाना उनका प्रमुख फोकस है।

रीजनल कॉन्फ्रेंस और ‘लैब टू लैंड’ की नई दिशा: शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले राष्ट्रीय स्तर की एक–दो बैठकों से बात आगे नहीं बढ़ पाती थी, इसलिए अब पूरे देश को पाँच हिस्सों में बाँटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस जयपुर में संपन्न हो चुकी है, दूसरी 24 तारीख को लखनऊ में होगी, और पूर्वोत्तर व हिल स्टेट्स के लिए अलग कॉन्फ्रेंस का आयोजन प्रस्तावित है, ताकि हर क्षेत्र की अलग एग्रो–क्लाइमेटिक कंडीशन के अनुसार फसलें, किस्में और खेती की पद्धतियाँ तय की जा सकें।

उन्होंने कहा कि हमारे पास हज़ारों कृषि वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने रिसर्च के दम पर उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन कई बार शोध लैब तक सीमित रह जाता है, खेत तक नहीं पहुँचता। इसीलिए अब नीति यह है कि “रिसर्च को लैब से लैंड तक ले जाएँ”, यानी वैज्ञानिक और किसान सीधे जुड़ें, प्रयोग खेतों में हों और परिणाम किसानों तक पहुँचें। इसी उद्देश्‍य से पिछले वर्ष शुरू किए गए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को इस साल हर राज्य की जलवायु और फसल चक्र के अनुरूप समय चुनकर चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें  वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की टीमें किसानों के बीच जाकर प्रशिक्षण देंगी।

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Join WhatsApp Group