महामंडलेश्वर बनी ममता कुलकर्णी पर विवाद क्यों?
भगवान की कृपा बताकर ममता ने महामंडलेश्वर पद पर उठे सवालों का दिया जवाब।…..
चंडीगढ़ : फिल्म अभिनेत्री रह चुकीं ममता कुलकर्णी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका धार्मिक रूप में किया गया परिवर्तन। जब उन्हें किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर के रूप में नियुक्त किया गया, तो यह निर्णय जहां एक ओर सनातन धर्म के कुछ वर्गों में सराहना का विषय बना, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस पर सवाल खड़े कर दिए।
अब ममता कुलकर्णी ने खुद सामने आकर इस पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महामंडलेश्वर बनना उनका कोई योजना या प्रचार का माध्यम नहीं था, बल्कि यह भगवान की कृपा का परिणाम था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कई वर्षों से साधना और तपस्या में लीन रही हैं और धर्म के मार्ग पर चलना उनका निजी और आध्यात्मिक निर्णय है।
ममता का यह भी कहना है कि जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में आध्यात्मिक शांति की तलाश करता है, तो समाज अक्सर उसे समझ नहीं पाता। उन्होंने यह भी बताया कि वह अब किसी फिल्म या ग्लैमर से जुड़ी गतिविधि का हिस्सा नहीं हैं और पूरी तरह से सन्यास और सेवा के मार्ग पर चल रही हैं।
किन्नर अखाड़ा, जो कि भारत में मान्यता प्राप्त 13 अखाड़ों में से एक है, ने ममता को महामंडलेश्वर की उपाधि देकर अपने आध्यात्मिक दृष्टिकोण को व्यापक रूप देने की कोशिश की। यह कदम समावेशिता और आध्यात्मिक विकास की दिशा में एक नया संदेश देता है, हालांकि विरोध और आलोचना का सामना करना भी स्वाभाविक था।
ममता कुलकर्णी ने यह भी कहा कि वह अब अपने जीवन को समाज और धर्म की सेवा में लगाना चाहती हैं। उन्हें यह पद इसलिए नहीं मिला कि वह एक पूर्व अभिनेत्री हैं, बल्कि इसलिए कि उन्होंने गहराई से साधना की और अखाड़े के संतों का विश्वास जीता।
ममता का यह रूप उनके प्रशंसकों के लिए भले ही हैरान करने वाला हो, लेकिन उन्होंने यह साबित किया है कि आत्मिक शांति के लिए जीवन में कभी भी नया रास्ता अपनाया जा सकता है।
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