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भारत-चीन जंग के 60 साल और बिग्रेडियर होशियार सिंह मार्ग

भारत-चीन युद्ध, ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग से अटल जी का चीनी एँबेसी पर प्रदर्शन,-- विवेक शुक्ला का युद्ध- विवाद पर लेख

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दिल्ली की बुजुर्ग हो रही पीढ़ी को याद है जब साठ साल पहले भारत-चीन युद्ध 20 अक्तूबर 1962 को शुरू हुआ तो राजधानी के आर.के.पुरम, लोदी कॉलोनी, लक्ष्मीबाई नगर जैसी कॉलोनियों में रहने वालों ने अपने-अपने इलाकों में जेड आकार की खाइयां बना ली थीं। चीन ने 20 अक्तूबर को अचानक से भारत की सीमा पर हमला बोला था। हालांकि तब दोनों के देशों के बीच सीमा विवाद गहरा रहा था, पर चीन की एकतरफा कार्रवाई की किसी ने उम्मीद नहीं की थी। उस युद्ध में विपरीत हालातों में लड़ते हुए भारत के वीर योद्धाओं ने चीन के गले में अंगूठा डाल दिया था। उनमें शूरवीरों में राजधानी से सटे झज्जर के रहने वाले ब्रिगेडियर होशियार सिंह भी थे। उनके नाम पर 1963 में लक्ष्मीबाई नगर में एक सड़क का नाम रखा गया।

ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग कहां ?

आपको साउथ दिल्ली के लक्ष्मीबाई नगर में ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग मिलता है। उनका पूरा नाम होशियार सिंह राठी था। उन्होंने 1962 की जंग में अपनी जान का नजराना दिया था भारत माता के लिए। वे सेला ब्रिज पर चीनी सेना के साथ हुई जंग में भारतीय सेना की टुकड़ी की अगुवाई कर रहे थे। कड़ाके की ठंड में गर्म कपड़े ना होने और युद्ध के लिए आवश्यक शस्त्रों के अभाव को उन्होंने आड़े आने नहीं दिया था। उनके कुशल नेतृत्व और शौर्य क चलते हमने चीन को तगड़ा नुकसान पहुंचाया था।

जब हुआ था सड़क का नामकरण: बिग्रेडियर होशियार सिंह मार्ग का नामकरण करने के लिए देश के तब के रक्षा मंत्री यशवंत राव चव्हाण खुद आए थे। उनके साथ दिल्ली सरकार के भी अनेक आला अफसर थे। यानी देश ने अपने उस महान शूरवीर की याद में एक कृतज्ञता का भाव प्रकट किया था।

अटल जी का चीनी एंबेसी पर भेड़ों के  साथ प्रदर्शन

जिस समय भारत- चीन के बीच जंग छिड़ी हुई थी तब अटल बिहारी वाजपेयी ने चीनी एँबेसी पर दर्जनों भेड़ों के साथ प्रदर्शन किया था। दरअसल तब चीन ने भारत पर एक हास्यास्पद आरोप लगाया था कि उसने सिक्किम की सीमा से 800 भेड़ें चुरा ली है। तब चीन ने भारत से उन भेड़ों को वापस करने की मांग की थी। चीन की इस मांग के जवाब में अटल जी ने जनसंघ के प्रदर्शन की अगुवाई की थी। वे तब तक लोकसभा के सदस्य थे और अपने ओजस्वी भाषणों के चलते देशभर में अपनी पहचान बना चुके थे। उन दिनों साउथ दिल्ली के लक्ष्मी बाई नगर में भास्कर राममूर्ति रहते थे। उन्हें याद है कि उनके एरिया के भी बहुत से लोगों ने अटल बिहारी वाजपेयी के उस प्रदर्शन भी भाग लिया था। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे कि विस्तारवादी चीन भेड़ों के मसले पर विश्व युद्ध चाहता है।

जंग में जीत के लिए दुआएं : साउथ दिल्ली के भोगल के बौद्ध विहार में नियमित रूप से सत्संग होता था जंग में भारत की जीत के लिए। उसमें शामिल होने वाले लोग रोज धन एकत्र करके राष्ट्रीय रक्षा कोष को देते थे। बाकी मंदिरों, गुरुद्वारों, गिरिजा घरों और मस्जिदों में भी प्रार्थनाएं हो रही थीं।

बॉलीवुड कहां पीछे रहा

भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि में चेतन आनन्द ‘हक़ीकत’ फिल्म का निर्माण किया। दिल्ली इस फिल्म को देखने के लिए टूट पड़ी थी। इसकी पब्लिसिटी कुछ इसी तरह की गई थी कि चेतन आनंद ने सीमा पर जाकर इस फिल्म की शूटिंग की है। धर्मेन्द्र, सुधीर, मैकमोहन भूपेन्द्र, बलराज साहनी, जयंत, प्रिया राजवंश ने तहलका मचा दिया था। कैफी आज़मी ने कलम तोड़ देशभक्ति के गाने लिखे थे इसमें। ये फिल्म शीला पर लगी थी थी। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो ने चेतन आनंद से कहा, ‘पुत्तर, 1962 के चीन युद्ध में हमारे पंजाब के कई जवान शहीद हो गए हैं, तुम शहीदों पर क्यों नहीं फिल्म बनाते?’ चेतन आनंद ने कहा, ‘शहीदों पर बनी फिल्म को कौन देखेगा और इसमें कौन पैसा लगाएगा?’ कैरो ने कहा, ‘यदि शहीदों पर फिल्म बनाई तो पूरा पंजाब तुम्हारे साथ खड़ा रहेगा। बोलो, फिल्म का बजट कितना होगा?’ इसके बाद चेतन आनंद ने हकीकत बनाई थी।

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