देश का पहला EVM नतीजा बदला, हारा हुआ कैंडिडेट जीता
सुप्रीम कोर्ट में री-काउंटिंग के बाद पानीपत में हारे उम्मीदवार को सरपंच पद मिला, बिहार चुनाव तक होगी चर्चा……..
पानीपत (हरियाणा) — देश में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से निकले नतीजे को कानूनी प्रक्रिया के बाद बदला गया है। हरियाणा के पानीपत जिले में हुए पंचायत चुनाव के एक विवादित परिणाम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए री-काउंटिंग का आदेश दिया और नतीजा पूरी तरह बदल गया।
मामला इस तरह शुरू हुआ कि सरपंच पद के लिए हुए चुनाव में उम्मीदवार महज कुछ वोटों से हार गया था। उसे पूरा भरोसा था कि गिनती में गड़बड़ी हुई है। पहले उसने नतीजे को जिला स्तर पर चुनौती दी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने गिनती दोबारा कराने का आदेश दिया। री-काउंटिंग के दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया — वोटों की गणना में गलती हुई थी और असल में हारने वाला उम्मीदवार ही सबसे ज्यादा वोट पाने वाला निकला। इस फैसले के बाद उसे आधिकारिक तौर पर विजेता घोषित कर सरपंच पद की शपथ दिला दी गई।
यह केस सिर्फ हरियाणा तक सीमित नहीं रहा। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर जोरदार बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने इसे EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आधार बना लिया है। उनका कहना है कि अगर पंचायत चुनाव में यह हो सकता है, तो बड़े चुनावों में भी गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वहीं, चुनाव आयोग और EVM का बचाव करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यहां तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि गिनती की प्रक्रिया में मानवीय त्रुटि हुई है। उनका तर्क है कि EVM से सही डाटा निकला था, लेकिन रिकॉर्डिंग और काउंटिंग में गलती हुई, जिसे कोर्ट के आदेश से सुधारा गया।
पानीपत के इस मामले ने बिहार तक सियासी असर डाला है। वहां के नेता इसे अपने चुनाव प्रचार में मुद्दा बनाने लगे हैं, खासकर आगामी विधानसभा और पंचायत चुनावों के मद्देनजर। सोशल मीडिया पर भी इस केस की खूब चर्चा हो रही है, जहां लोग इसे लोकतंत्र में पारदर्शिता और न्याय की जीत बता रहे हैं।
गांव के लोग बताते हैं कि नए सरपंच के शपथ ग्रहण के दिन माहौल काफी भावुक था। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और मिठाइयां बांटीं। वहीं, पूर्व घोषित विजेता और उसके समर्थकों में निराशा साफ दिखी, लेकिन उन्होंने कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की बात कही।
यह मामला आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया और गिनती के मानकों को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से बचने के लिए तकनीक और प्रक्रिया दोनों में पारदर्शिता और सख्ती बढ़ानी होगी।
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