तारागढ़ में बुलडोज़र चला, प्रशासन का एक्शन - News On Radar India

तारागढ़ में बुलडोज़र चला, प्रशासन का एक्शन

अजमेर की पहाड़ियों पर 100 दुकानों को तोड़ा गया, प्रशासन की भारी कार्रवाई…..

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अजमेर राजस्थान की ऐतिहासिक नगरी अजमेर के तारागढ़ क्षेत्र में शनिवार की सुबह कुछ अलग ही माहौल था। सुबह करीब 7 बजे जब लोग अपनी रोज़मर्रा की शुरुआत की तैयारी में थे, तभी पहाड़ियों की ओर अचानक दर्जनों सरकारी गाड़ियाँ, पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। इस अचानक हुई हलचल ने पूरे इलाके को चौंका दिया। कुछ ही देर में यह साफ हो गया कि यहां प्रशासन एक बड़ी कार्रवाई के लिए आया है।

तारागढ़ की पहाड़ियों में बसी हुई लगभग 100 से अधिक दुकानें, जिनमें चाय की टपरियां, प्रसाद की दुकानें और छोटी-मोटी अस्थायी झोपड़ियां शामिल थीं, प्रशासन ने अवैध कब्जा बताते हुए ढहा दीं। यह सबकुछ कुछ ही घंटों में हो गया। कुछ दुकानदारों के पास अपने सामान को समेटने तक का वक्त नहीं था। कई लोगों की आँखों में आंसू थे तो कुछ लोग इस कार्रवाई के खिलाफ रोष में नजर आए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दुकानों से कई परिवारों की रोजी-रोटी चलती थी। कुछ दुकानदारों ने बताया कि वे पिछले 10 से 15 सालों से यहां काम कर रहे थे और कभी भी उन्हें नोटिस नहीं दिया गया। वहीं, प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है और कई बार चेतावनी के बावजूद दुकानदारों ने अतिक्रमण नहीं हटाया था।

वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में यह भी कहा गया कि तारागढ़ क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत आता है और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह आवश्यक था। इस कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

इस घटना ने एक बार फिर उस सवाल को जन्म दे दिया है, जो हर बार बुलडोज़र की कार्रवाई के बाद उठता है—क्या विकास और व्यवस्था के नाम पर लोगों की आजीविका को ऐसे उजाड़ा जाना सही है? क्या पहले से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकती थी?

प्रशासन का तर्क है कि यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे अतिक्रमण से मुक्त कराना ज़रूरी था, लेकिन दूसरी ओर इन दुकानदारों की अपनी पीड़ा है, जिनकी रोज़ी-रोटी एक झटके में छिन गई। यह कार्रवाई आने वाले समय में प्रशासनिक नियमन और मानवीय संवेदनाओं के संतुलन पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकती है। सवाल यह नहीं कि अतिक्रमण गलत है या नहीं, सवाल यह है कि क्या उसे हटाने का तरीका मानवीय था?

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