डॉ पुरोहित: प्रदेश सरकार निजीकरण की बजाय स्वास्थ्य बजट बढ़ाने, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खाली पद भरने तथा…..
....सरकारी अस्पतालों को संसाधनों से सशक्त बनाने पर ध्यान दे
हमारे सामुदायिक स्वास्थ्य विषेषज्ञ *डॉ नरेश पुरोहित (सलाहकार, राष्ट्रीय हॉस्पिटल प्रबंधन एसोसिएशन), मध्य प्रदेश में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण प्रयासों पर अपनी शोध रिपोर्ट के साथ
भोपाल: प्रदेश सरकार निजीकरण की बजाय स्वास्थ्य बजट बढ़ाने, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के खाली पद भरने तथा सरकारी अस्पतालों को संसाधनों से सशक्त बनाने पर ध्यान दे। यह खुलासा अखिल भारतीय अस्पताल प्रशासक संघ के कार्यकारी सदस्य डॉ नरेश पुरोहित ने हाल ही में तैयार कि गई अपनी शोध रिपोर्ट में किया। उन्होंने जानकारी देते हुए यहां बताया कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर
करने के उद्देश्य से सूबे की सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी संस्थाओं को सौंपने का निर्णय लिया है। पहले चरण में रीवा, देवास और गुना जिले के कुल 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट परियोजना में शामिल किया गया है।
एसोसिएशन ऑफ स्टडीज फॉर हेल्थकेयर के प्रमुख अन्वेषक,डॉ. पुरोहित ने बताया कि प्रदेश पहले से ही मातृ मृत्यु दर जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निजीकरण किया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी व्यवस्था के निजीकरण से भविष्य में भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
प्रसिद्ध महामारी रोग विशेषज्ञ ने आशंका व्यक्त करते हुए बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट, पोस्टमार्टम और अन्य मेडिकल जांच जैसे संवेदनशील कार्य किए जाते हैं।
इनकी रिपोर्ट अदालतों में भी साक्ष्य के रूप में पेश होती है। ऐसे में यदि ये केंद्र निजी संस्थाओं के हवाले कर दिए गए तो इन प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की सबसे बड़ी चुनौती निजीकरण नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों और मानवबल की भारी कमी है। ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2021-22 के अनुसार मध्य प्रदेश में 4,134 उप स्वास्थ्य केंद्र, 1,045 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 245 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक प्रदेश में 55 जिला अस्पताल, 51 ट्रॉमा सेंटर, 158 सिविल अस्पताल, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 10,256 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का बड़ा कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पद हैं। रिपोर्ट के अनुसार 5,543 विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत पदों में 3,698, 6,513 चिकित्सा अधिकारियों के पदों में 2,689 तथा 728 दंत चिकित्सा अधिकारियों के पदों में 481 पद खाली हैं। ऐसे में निजीकरण के बजाय इन पदों पर नियमित भर्ती की जरूरत है।
उन्होंने जोर देकर बताया कि यदि सरकार वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार चाहती है तो निजीकरण की राह छोड़कर सरकारी अस्पतालों में निवेश बढ़ाए, रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती करे और स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए। उन्होने कहा कि मजबूत सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ही आम लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज दे सकती है। ———————————————
*डॉ नरेश पुरोहित- एमडी, डीएनबी , डीआई एच , एमएचए, एमआरसीपी (यूके) एक महामारी रोग
विशेषज्ञ हैं। वे भारत के राष्ट्रीय संक्रामक रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार हैं। मध्य प्रदेश एवं दूसरे प्रदेशों की सरकारी संस्थाओं में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम , राष्ट्रीय पर्यावरण एवं वायु प्रदूषण के संस्थान के सलाहकार हैं। एसोसिएशन ऑफ किडनी केयर स्ट्डीज एवं हॉस्पिटल प्रबंधन एसोसिएशन के भी सलाहकार हैं।