आज गुरुवार,19 मार्च से हिंदू नव वर्ष ‘2083 रौद्र संवत्सर’ का प्रारंभ !
‘रौद्र संवत्सर’ में गुरु होंगे वर्ष के राजा, मंगल होंगे मंत्री : वर्ष 2083 भारत वर्ष के लिए धन-धान्य, पर्याप्त वर्षा एवं सुखद परिवर्तन के संकेत देता है।
नई दिल्ली: भारतीय पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। यह तिथि सना
तन परंपरा में अत्यंत पवित्र और मंगलकारी मानी जाती है। पुराणों के अनुसार इसी दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिवस भी कहा जाता है।
वर्ष 2026 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ होगा। उत्तर भारत में इस दिन से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होते हैं और घर-घर में माता दुर्गा की पूजा, कलश स्थापना और व्रत शुरू किए जाते हैं।
📜 संवत्सर का नाम : रौद्र संवत्सर: भारतीय ज्योतिष परंपरा में 60 संवत्सरों का एक चक्र माना गया है। विक्रम संवत 2083 का नाम “रौद्र संवत्सर” है और यह इस चक्र का 54वाँ संवत्सर माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से रौद्र संवत्सर को परिवर्तन और सक्रियता का वर्ष माना जाता है, जिसमें सामाजिक, राजनीतिक और प्राकृतिक परिस्थितियों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
⭐ इस वर्ष के 3 प्रमुख ज्योतिषीय संकेत:
🔶 1. गुरु का राजत्व: गुरु के राजा होने से धर्म, शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में प्रगति तथा समाज में नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ने की संभावना रहती है।
🔶 2. मंगल मंत्री का प्रभाव: मंगल के मंत्री होने से प्रशासनिक सक्रियता, रक्षा क्षेत्र की मजबूती तथा ऊर्जा और निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में गति देखने को मिल सकती है।
🔶 3. रोहिणी का समुद्र वास : रोहिणी के समुद्र में स्थित होने के कारण वर्षा सामान्य से अच्छी होने और कृषि उत्पादन में सुधार के संकेत माने जाते हैं।
🌟 वर्ष का राजा और मंत्री : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस वार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पड़ती है, उस वार के स्वामी ग्रह को वर्ष का राजा माना जाता है।
इस वर्ष —⭐ राजा — गुरु (बृहस्पति); 🔥 मंत्री — मंगल,
🟢 गुरु राजा होने का फल : बृहस्पति को धर्म, ज्ञान और सदाचार का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। गुरु के राजा होने से—
* धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि,
* विद्वानों और संतों का सम्मान,
* शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में प्रगति,
* कृषि और अन्न उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ,
🔴 मंगल मंत्री होने का प्रभाव : मंगल ग्रह साहस, शक्ति और पराक्रम का कारक माना जाता है। मंगल मंत्री होने से—
* प्रशासनिक निर्णयों में दृढ़ता,
* रक्षा और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान,
* निर्माण और तकनीकी क्षेत्रों में गतिविधि,
* कुछ स्थानों पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा,
🌧 संवत्सर का वाहन: ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष का वाहन “वातक” माना गया है। इसके प्रभाव से वर्षा का वितरण कुछ क्षेत्रों में असामान्य रहने की संभावना व्यक्त की जाती है।
🌾 रोहिणी का वास : इस वर्ष रोहिणी का वास समुद्र में बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे वर्षा सामान्यतः अच्छी होने और कृषि उत्पादन में वृद्धि के संकेत मिलते हैं।
📅 वर्ष की विशेषता : अधिक मास: विक्रम संवत 2083 में अधिक मास पड़ने के कारण इस वर्ष 13 महीने होंगे। धार्मिक दृष्टि से अधिक मास को जप, तप, दान और भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष पुण्यदायक माना जाता है।
🪔 नवसंवत्सर का धार्मिक महत्व : नवसंवत्सर के दिन से ही चैत्र नवरात्र प्रारंभ होते हैं। इस दिन—
* कलश स्थापना,
* माता दुर्गा की पूजा,
* पंचांग पूजन,
विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
🙏 नववर्ष के दिन क्या करें : * प्रातःकाल स्नान कर शुभ संकल्प लें,
* भगवान ब्रह्मा, विष्णु और गणेश की पूजा करें,
* माता दुर्गा की उपासना करें,
* घर में दीपक जलाकर मंगलकामना करें |
✨ नवसंवत्सर के शुभ उपाय : विष्णु सहस्रनाम का पाठ; * गायत्री मंत्र का जप; * पीली वस्तुओं का दान; * जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र देना |
* नवग्रहों की शांति के लिए प्रार्थना : —
🌼 नवसंवत्सर का विशेष संदेश : नवसंवत्सर केवल नया वर्ष नहीं बल्कि नई ऊर्जा, नए संकल्प और सकारात्मक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। यह हमें धर्म, सदाचार और समाज कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
— ✍️ पं रोहित शास्त्री; 
New Delhi. Ph: +918010004343.
Instagram: @Astro.RohitShastri.
Follow the Astro Rohit Shastri channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029VbCXAOxICVfgTwjdMZ2E.