बीजेपी अध्यक्ष पद पर नामों को लेकर संशय
RSS की नाराज़गी के बीच धनखड़ का इस्तीफा बना चर्चा का विषय…..
दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की
अटकलों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। सूत्रों के अनुसार आरएसएस भाजपा अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों की सिफारिश कर रही है, उन पर पार्टी के अंदर सहमति नहीं बन पा रही है। वहीं कुछ नामों को लेकर संघ की ओर से असहमति भी सामने आ रही है। धनखड़ का नाम भी चर्चाओं में आया था लेकिन अब उनके इस्तीफे की खबरों के बाद नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
दरअसल, साल 2022 में जब द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनी थीं, उसी वर्ष जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति बनाया गया था। यह कदम खासतौर पर जाट समुदाय को साधने के लिए बताया गया था, क्योंकि उस समय किसान आंदोलन के कारण भाजपा और जाट समुदाय के बीच दरार आ गई थी। जगदीप धनखड़ की छवि एक किसान पुत्र की रही है और यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि भाजपा किसानों के हितों के लिए काम कर रही है।
हालांकि अब जब पार्टी संगठन में बदलाव की तैयारी की जा रही है, तो एक बार फिर से जाट समुदाय को साधने की रणनीति पर काम हो रहा है। लेकिन संघ की नाराजगी इस बात को लेकर है कि पार्टी केवल राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए चेहरों का चयन कर रही है, न कि संगठन की विचारधारा को प्राथमिकता दे रही है। यही कारण है कि भाजपा अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित नामों को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं।
धनखड़ का इस्तीफा अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्होंने आंतरिक असहमति के चलते यह कदम उठाया है। कुछ लोग इसे 2024 के बाद बनने वाली राजनीति की तैयारी भी मान रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा अध्यक्ष का पद एक बार फिर से किसी मजबूत और संघ से जुड़े नेता को दिया जाएगा या फिर जमीनी स्तर पर मजबूत किसी सामाजिक समूह को साधने के लिए रणनीतिक चेहरा आगे लाया जाएगा।
भाजपा और आरएसएस के बीच यह खींचतान नया नहीं है, लेकिन जब बात शीर्ष नेतृत्व की हो तो दोनों के बीच सहमति बनाना अनिवार्य हो जाता है। अब यह भविष्य ही बताएगा कि भाजपा अपने नए अध्यक्ष के रूप में किसे सामने लाती है और क्या यह निर्णय पार्टी और संगठन दोनों को संतुष्ट कर पाएगा या नहीं।
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