फगवाड़ा /कपूरथला : पंजाब के फगवाड़ा में गुरुवार को किसानों का आक्रोश एक बार फिर देखने को मिला। शुगर मिल के बकाए पैसों का भुगतान न होने से गुस्साए किसानों ने शुगर मिल के गेट पर ताला जड़ दिया और धरना प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन दोआबा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन से पूरा दिन प्रशासन और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनी रही।
1. शुगर मिल पर 27 करोड़ रुपये का बकाया
फगवाड़ा की वाहद संधर शुगर मिल के खिलाफ गन्ना किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच सालों से किसानों का 27 करोड़ रुपये का बकाया राशि नहीं चुकाई गई है। मिल के नए मालिकों राणा गुरजीत सिंह और उनके पुत्र द्वारा भुगतान का वादा किया गया था, लेकिन पांच महीने बीतने के बाद भी किसानों को उनका पैसा नहीं मिला। किसानों का कहना है कि प्रशासन और मिल के मालिक दोनों ही वादाखिलाफी कर रहे हैं।
2. प्रशासन से बातचीत विफल, किसानों ने जड़ा ताला
किसानों का धरना शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासन की ओर से बार-बार समय मांगने के बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो गुस्साए किसानों ने मिल के गेट पर ताला जड़ दिया। एसएसपी कपूरथला और डीसी फगवाड़ा की मौजूदगी में यह घटना घटी, जो किसानों को मनाने और धरना समाप्त करवाने पहुंचे थे। प्रशासन की कोशिशों के बावजूद किसान अपने फैसले पर अडिग रहे।
3. संपत्तियों की नीलामी की मांग
किसानों की मुख्य मांग यह है कि मिल की संपत्तियों को नीलाम कर उनके बकाया पैसों का भुगतान किया जाए। भारतीय किसान यूनियन दोआबा के अध्यक्ष मनजीत सिंह राय और सचिव सतनाम सिंह साहनी ने कहा कि प्रशासन ने 18 नवंबर 2021 को मिल की संपत्तियों को नीलामी के लिए अटैच किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है, और अब उन्हें मजबूर होकर मिल के गेट पर ताला लगाना पड़ा।
4. हाईवे जाम की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे फगवाड़ा में हाईवे जाम करेंगे। किसानों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता और मिल मालिकों की वादाखिलाफी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर जल्द ही उनके बकाया का भुगतान नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
फगवाड़ा में किसानों का यह आंदोलन प्रशासन और शुगर मिल के मालिकों के खिलाफ किसानों की निराशा और गुस्से का प्रतीक है। किसानों की मांगें स्पष्ट हैं—उन्हें उनका बकाया चाहिए, चाहे इसके लिए मिल की संपत्तियों की नीलामी ही क्यों न करनी पड़े। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।
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